
● मुंबई
मुंबई में पेट्रोल और डीजल की लगातार बढ़ती कीमतों के कारण अब स्कूल शिक्षा व्यवस्था को लेकर नई मांग उठने लगी है। इंडिया वाइड पेरेंट्स एसोसिएशन सहित विभिन्न अभिभावक संगठनों और स्कूल बस संचालकों ने राज्य सरकार से अपील की है कि फिलहाल स्कूलों को हाइब्रिड मोड यानी ऑनलाइन और ऑफलाइन दोनों माध्यमों से संचालित किया जाए।
प्रस्ताव के अनुसार सप्ताह में तीन दिन स्कूल ऑफलाइन चलें, जबकि दो दिन ऑनलाइन कक्षाएं आयोजित की जाएं। बस संचालकों का कहना है कि ईंधन की बढ़ती कीमतों से उनके संचालन खर्च में भारी इजाफा हुआ है। इसका सीधा असर स्कूल बस फीस पर पड़ेगा और अंततः आर्थिक बोझ अभिभावकों को उठाना होगा।
महाराष्ट्र में लगभग 40 हजार स्कूल बसें संचालित होती हैं और प्रत्येक बस प्रतिदिन औसतन 18 से 20 लीटर डीजल की खपत करती है। ऐसे में यदि हाइब्रिड मॉडल अपनाया जाता है तो हर सप्ताह करीब 16 लाख लीटर डीजल की बचत संभव है। इससे आर्थिक राहत मिलने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण में भी मदद मिल सकती है।
स्कूल बस एसोसिएशन ने सरकार से इस क्षेत्र को राहत देने के लिए सब्सिडी अथवा कर में छूट देने की मांग भी की है। साथ ही, उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया है कि 1 जून तक इस विषय पर स्पष्ट निर्णय लिया जाए, ताकि स्कूल संचालन की आगे की योजना समय पर बनाई जा सके।
कुल मिलाकर, बढ़ती ईंधन कीमतों का असर अब शिक्षा व्यवस्था पर भी दिखाई देने लगा है और हाइब्रिड मॉडल को एक व्यावहारिक समाधान के रूप में देखा जा रहा है।
