▪️700 ब्रास मिट्टी उत्खनन पर रॉयल्टी माफ

▪️मुंबई
राज्य सरकार ने पारंपरिक कुम्हार समुदाय को आर्थिक संबल देने के उद्देश्य से महत्वपूर्ण निर्णय लेते हुए प्रति वर्ष 700 ब्रास तक मिट्टी उत्खनन पर रॉयल्टी पूरी तरह माफ कर दी है। मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के निर्देश पर राजस्व मंत्री चंद्रशेखर बावनकुले ने इस संबंध में आदेश जारी किए हैं। इस फैसले से राज्यभर के हजारों कुम्हार परिवारों को अपने पारंपरिक व्यवसाय को आगे बढ़ाने में राहत मिलेगी।
नई व्यवस्था के तहत कुम्हार परिवार तालाबों, नदियों, नालों, खाड़ियों तथा सरकारी पड़ी भूमि से सालाना 700 ब्रास तक मिट्टी बिना किसी स्वामित्व शुल्क के प्राप्त कर सकेंगे। इस मिट्टी का उपयोग ईंट, टाइल, मटके और अन्य पारंपरिक मिट्टी उत्पादों के निर्माण में किया जाएगा।
सरकार ने योजना के लिए ‘पारंपरिक कुम्हार परिवार’ की परिभाषा भी तय की है, जिसमें पति-पत्नी और 18 वर्ष से कम आयु के बच्चे शामिल होंगे। योजना का लाभ परिवार के एक सदस्य को दिया जाएगा। साथ ही यदि कुम्हार परिवार स्वयं जलाशयों से गाद निकालता है, तो 700 ब्रास तक उस पर भी रॉयल्टी नहीं देनी होगी, हालांकि संबंधित विभाग की पूर्व अनुमति आवश्यक रहेगी।
कुम्हारों की सुविधा के लिए पहचान पत्र, ‘वन विंडो सिस्टम’ और क्लस्टर विकास जैसी योजनाएं भी लागू की जाएंगी। पहचान पत्र की वैधता पांच वर्ष होगी और इसके लिए आवेदन महाखनिज पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन किया जा सकेगा।
इसके अतिरिक्त पारंपरिक कुम्हार खदानों से अतिक्रमण हटाने तथा महानिर्मिती के बिजली संयंत्रों से फ्लाय ऐश मात्र 100 रुपए प्रति टन की रियायती दर पर उपलब्ध कराने का भी निर्णय लिया गया है। सरकार का मानना है कि इन कदमों से कुम्हार समुदाय के पारंपरिक व्यवसाय को नई ऊर्जा मिलेगी और उनकी आजीविका अधिक सुदृढ़ होगी।
