▪️ शहरी इलाकों में स्थिति ज्यादा खराब

- मुंबई
देश में लिंग अनुपात को लेकर चिंता बरकरार है। केंद्र सरकार की सैंपल रजिस्ट्रेशन सिस्टम (एस आर एस ) रिपोर्ट के अनुसार, देश में प्रति हजार लड़कों पर लड़कियों की संख्या 918 है, जबकि महाराष्ट्र के शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा घटकर केवल 885 रह गया है। यह राष्ट्रीय औसत से काफी कम है। वहीं, राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में यह अनुपात 910 दर्ज किया गया है।
आमतौर पर शहरी क्षेत्रों में बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं के कारण लिंग अनुपात संतुलित रहता है, लेकिन महाराष्ट्र में इसके उलट स्थिति देखने को मिल रही है। राज्य के शहरों में लड़कियों की घटती संख्या अब हरियाणा और बिहार जैसे राज्यों के स्तर तक पहुंच गई है, जो एक गंभीर सामाजिक संकेत है।
विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे ‘बेटा ही चाहिए’ जैसी मानसिकता मुख्य कारण है। आधुनिक तकनीक का दुरुपयोग कर गर्भ में ही लिंग जांच और उसके बाद कन्या भ्रूण हत्या जैसी घटनाएं अब भी जारी हैं। कानूनन प्रतिबंध होने के बावजूद इस तरह की गतिविधियां पूरी तरह बंद नहीं हो पाई हैं।
इसके अलावा, राज्य में प्रजनन दर पहले ही 1.4 तक गिर चुकी है। ऐसे में यदि बेटियों का जन्मदर लगातार घटता रहा, तो भविष्य में ‘मैरेज स्क्वीज’ जैसी सामाजिक समस्याएं गंभीर रूप ले सकती हैं।
