
▪️ नई दिल्ली
देश में हवाई यात्रा करने वाले लाखों यात्रियों के लिए राहत भरी खबर है। विमानन क्षेत्र से जुड़े जानकारों का मानना है कि आने वाले दिनों में फ्लाइट टिकटों की कीमतों में कमी देखने को मिल सकती है। इसके पीछे प्रमुख कारण एविएशन टर्बाइन फ्यूल (एटीएफ) की लागत में संभावित गिरावट, राज्यों द्वारा करों में राहत और विमानन क्षेत्र के लिए सरकार की नई पहलें मानी जा रही हैं।
विमान कंपनियों के कुल परिचालन खर्च में एटीएफ की हिस्सेदारी लगभग 40 प्रतिशत तक होती है। पिछले कुछ समय से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव के कारण एयरलाइनों पर लागत का दबाव बढ़ गया था, जिसका असर यात्रियों को महंगे टिकटों के रूप में झेलना पड़ा। अब वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों में नरमी आने से एयरलाइनों को राहत मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा कई राज्यों ने एटीएफ पर लगने वाले वैट में कटौती की है। इससे एयरलाइनों की लागत कम होगी और प्रतिस्पर्धा बढ़ने के साथ इसका लाभ यात्रियों तक पहुंच सकता है। केंद्र सरकार भी विमानन क्षेत्र को ईंधन कीमतों में अचानक होने वाले बदलावों से बचाने के लिए मूल्य स्थिरीकरण संबंधी उपायों पर काम कर रही है।
हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि हवाई किराया केवल ईंधन की कीमतों पर निर्भर नहीं करता। यात्री मांग, मौसम, उड़ानों की उपलब्धता, एयरलाइनों के बीच प्रतिस्पर्धा और परिचालन खर्च जैसे कई अन्य कारक भी टिकट दरों को प्रभावित करते हैं। इसके बावजूद मौजूदा परिस्थितियां संकेत दे रही हैं कि आने वाले महीनों में हवाई यात्रा अपेक्षाकृत सस्ती हो सकती है और यात्रियों को टिकट कीमतों में राहत मिल सकती है।
