▪️नागरिकता पर केंद्र की बड़ी स्पष्टता

- नई दिल्ली
भारतीय नागरिकता को लेकर देशभर में चल रही चर्चाओं के बीच केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण स्पष्टता देते हुए कहा है कि आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस और यहां तक कि पासपोर्ट भी अपने आप में भारतीय नागरिकता का अंतिम और निर्णायक प्रमाण नहीं हैं। सरकार के अनुसार ये दस्तावेज पहचान, निवास, कराधान या यात्रा संबंधी उद्देश्यों के लिए जारी किए जाते हैं, जबकि नागरिकता का निर्धारण अलग कानूनी प्रक्रिया के तहत किया जाता है।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि भारतीय नागरिकता का आधार नागरिकता अधिनियम, 1955 और उसके अंतर्गत निर्धारित प्रावधान हैं। किसी व्यक्ति की नागरिकता जन्म, वंश, पंजीकरण, प्राकृतिककरण अथवा भारत में किसी क्षेत्र के विलय जैसी कानूनी व्यवस्थाओं के माध्यम से तय होती है। ऐसे मामलों में जन्म प्रमाणपत्र, माता-पिता की नागरिकता से जुड़े अभिलेख, नागरिकता प्रमाणपत्र तथा अन्य वैधानिक दस्तावेजों को अधिक महत्व दिया जाता है।
केंद्र का कहना है कि आधार कार्ड केवल पहचान और निवास का प्रमाण है, जबकि वोटर आईडी मतदान के अधिकार से जुड़ा दस्तावेज है। इसी तरह पैन कार्ड आयकर संबंधी पहचान के लिए और पासपोर्ट अंतरराष्ट्रीय यात्रा के लिए जारी किया जाता है। इन दस्तावेजों के आधार पर किसी व्यक्ति की नागरिकता का अंतिम निर्णय नहीं किया जा सकता।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में सभी नागरिकों को अलग से नागरिकता प्रमाणपत्र जारी नहीं किया जाता, इसलिए नागरिकता संबंधी किसी विवाद या सत्यापन की स्थिति में विभिन्न सरकारी अभिलेखों और कानूनी दस्तावेजों का समग्र परीक्षण किया जाता है। केंद्र सरकार की इस स्पष्टता के बाद नागरिकता और पहचान संबंधी दस्तावेजों के बीच अंतर को लेकर बहस फिर तेज हो गई है।
