▪️ सूर्यकांत उपाध्याय

एक बार एक व्यक्ति को रास्ते में यमराज मिल गए, लेकिन वह उन्हें पहचान नहीं सका। यमराज ने उससे पीने के लिए पानी माँगा। उस व्यक्ति ने बिना एक क्षण गंवाए उन्हें पानी पिला दिया।
पानी पीने के बाद यमराज ने कहा, ‘मैं तुम्हारे प्राण लेने आया हूँ। लेकिन चूँकि तुमने मेरी प्यास बुझाई है, इसलिए मैं तुम्हें अपनी किस्मत बदलने का एक अवसर देता हूँ।’
यह कहकर यमराज ने उसे एक डायरी दी और बोले, ‘तुम्हारे पास केवल पाँच मिनट का समय है। इस डायरी में तुम जो भी लिखोगे, वही हो जाएगा। लेकिन ध्यान रहे, केवल पाँच मिनट।’
उस व्यक्ति ने डायरी खोली। पहले पृष्ठ पर लिखा था कि उसके पड़ोसी की लॉटरी निकलने वाली है और वह करोड़पति बनने वाला है। उसने तुरंत लिख दिया कि उसके पड़ोसी की लॉटरी न निकले।
अगले पृष्ठ पर लिखा था कि उसका एक मित्र चुनाव जीतकर मंत्री बनने वाला है। उसने वहाँ लिख दिया कि उसका मित्र चुनाव हार जाए।
इस प्रकार वह एक-एक करके पृष्ठ पलटता रहा। अंत में उसे अपना पृष्ठ दिखाई दिया।
जैसे ही उसने कुछ लिखने के लिए अपना पेन उठाया, यमराज ने उसके हाथ से डायरी ले ली और कहा, ‘वत्स, तुम्हारे पाँच मिनट पूरे हो चुके हैं। अब कुछ नहीं हो सकता। तुमने अपना सारा समय दूसरों का बुरा सोचने और उनका अहित करने में व्यर्थ कर दिया। अपने बारे में सोचने का समय ही नहीं बचाया।’
‘अब तुम्हारा अंत निश्चित है।’
यह सुनकर वह व्यक्ति बहुत पछताया, लेकिन सुनहरा अवसर उसके हाथ से निकल चुका था।
