
- मुंबई
यूरोप में इन दिनों बढ़ती गर्मी और लगातार पड़ रही हीटवेव ने लोगों की जीवनशैली बदलनी शुरू कर दी है। ऐसे समय में एक सवाल बार-बार उठ रहा है कि दुनिया की सबसे विकसित अर्थव्यवस्थाओं में शामिल जर्मनी में आखिर अधिकांश घरों में एयर कंडीशनर (एसी) क्यों नहीं होते?
दरअसल, जर्मनी और उत्तरी यूरोप के अधिकांश देशों की जलवायु लंबे समय तक अपेक्षाकृत ठंडी रही है। इसलिए वहां मकानों का निर्माण सर्दियों में गर्मी को भीतर बनाए रखने के उद्देश्य से किया गया। पहले गर्मियां कम अवधि की और अपेक्षाकृत हल्की होती थीं, इसलिए एसी को कभी आवश्यक सुविधा नहीं माना गया। यही कारण है कि आज भी जर्मनी के केवल लगभग 6 प्रतिशत घरों में एसी उपलब्ध हैं, जबकि अमेरिका में करीब 90 प्रतिशत घरों में यह सामान्य सुविधा है। पूरे यूरोप में यह औसत लगभग 20 प्रतिशत है।
हालांकि अब जलवायु परिवर्तन ने स्थिति बदल दी है। हाल के वर्षों में यूरोप में भीषण गर्मी की घटनाएं तेजी से बढ़ी हैं। शोधकर्ताओं के अनुसार जून 2026 का तापमान सामान्य से 2 से 4 डिग्री सेल्सियस अधिक दर्ज किया गया। इसके चलते जर्मनी में वर्ष 2019 से 2024 के बीच एयर कंडीशनर और कूलिंग उपकरणों की मांग में लगभग 75 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।
इसके बावजूद एसी की व्यापक स्थापना आसान नहीं है। जर्मनी के पुराने भवनों में एसी लगाना तकनीकी रूप से कठिन और महंगा है। किराये के मकानों में रहने वाले लोगों को अक्सर मकान मालिक या भवन प्रबंधन की अनुमति नहीं मिलती। कई ऐतिहासिक शहरों में भवनों की बाहरी संरचना बदलने पर भी नियम लागू हैं। इसके अलावा बिजली की ऊंची कीमतें भी लोगों को एसी खरीदने से रोकती हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि अब यूरोप को गर्मी को भी उतनी ही गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य चुनौती मानना होगा, जितनी सर्दियों में ठंड को माना जाता है। इसके साथ ही ऊर्जा दक्ष भवन, बेहतर वेंटिलेशन, हरित क्षेत्र, हीट पंप और आधुनिक कूलिंग तकनीकों को बढ़ावा देने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि बढ़ती गर्मी से राहत भी मिले और पर्यावरण पर अतिरिक्त बोझ भी न पड़े।
