- उच्च जोखिम वाले नवजातों की घर-घर होगी विशेष निगरानी

▪️ नई दिल्ली
नवजात शिशुओं और छोटे बच्चों के स्वास्थ्य संरक्षण को नई मजबूती देने के लिए केंद्र सरकार ने ‘समग्र शिशु बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम’ शुरू किया है। इस पहल के तहत जन्म से लेकर तीन वर्ष तक के उन बच्चों की विशेष निगरानी की जाएगी, जिन्हें स्वास्थ्य संबंधी अधिक जोखिम की श्रेणी में रखा गया है।
कार्यक्रम के अंतर्गत आशा कार्यकर्ता, एएनएम, सामुदायिक स्वास्थ्य अधिकारी और आंगनवाड़ी कार्यकर्ता मिलकर ऐसे बच्चों के घर नियमित रूप से पहुंचेंगे। जोखिम के स्तर के अनुसार नवजात शिशुओं के लिए जन्म के बाद पहले 42 दिनों में अधिकतम नौ गृह भ्रमण किए जाएंगे, जबकि तीन वर्ष तक के जोखिमग्रस्त बच्चों के लिए आठ अतिरिक्त गृह भ्रमण का प्रावधान किया गया है।
सरकार का उद्देश्य समय रहते बीमारी की पहचान करना, कुपोषण रोकना, बच्चों की वृद्धि और विकास की सतत निगरानी करना तथा आवश्यक चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है। इसके लिए प्रत्येक ग्राम स्वास्थ्य, स्वच्छता एवं पोषण दिवस पर ‘वेल बेबी सेशन’ आयोजित किए जाएंगे। साथ ही आयुष्मान आरोग्य मंदिरों में हर महीने ‘शिशु शिविर’ लगाकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच और आवश्यक उपचार सुनिश्चित किया जाएगा।
स्वास्थ्य मंत्रालय का मानना है कि जीवन के शुरुआती एक हजार दिन बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं। ऐसे में यह कार्यक्रम शिशु मृत्यु दर कम करने, कुपोषण पर अंकुश लगाने और बच्चों को स्वस्थ भविष्य देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।
