- नई दिल्ली
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा है कि आज पूरी दुनिया अनेक चुनौतियों से जूझ रही है और इन समस्याओं का स्थायी समाधान भारत के समग्र एवं संतुलित जीवन-दर्शन में निहित है। उनका कहना था कि भारतीय चिंतन मानव, प्रकृति और समाज के बीच संतुलन स्थापित करने की सीख देता है, जो वर्तमान वैश्विक परिस्थितियों में पहले से अधिक प्रासंगिक हो गया है।

भागवत ने कहा कि भारत की संस्कृति केवल अपने देश तक सीमित नहीं है, बल्कि संपूर्ण मानवता के कल्याण का संदेश देती है। उन्होंने कहा कि विश्व आज ऐसे विकास मॉडल की तलाश में है, जो केवल आर्थिक प्रगति तक सीमित न होकर नैतिक मूल्यों, सामाजिक समरसता और पर्यावरण संरक्षण को भी समान महत्व दे। भारत का जीवन-दर्शन इसी व्यापक दृष्टि को प्रस्तुत करता है।
उन्होंने समाज में सेवा, संस्कार और संगठन की भावना को मजबूत बनाने पर बल देते हुए कहा कि यदि भारत अपनी सांस्कृतिक शक्ति और मूल्यों के आधार पर आगे बढ़ेगा, तो वह विश्व के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकेगा। उनके अनुसार भारत का उद्देश्य किसी पर प्रभुत्व स्थापित करना नहीं, बल्कि मानवता के हित में सहयोग और मार्गदर्शन देना है।
