▪️ खान-पान पर कंट्रोल करके रहें फिट

मानसून का मौसम राहत तो देता है, लेकिन इसी दौरान पाचन शक्ति कमजोर होने और संक्रमण का खतरा भी बढ़ जाता है। आयुर्वेद के अनुसार वर्षा ऋतु में शरीर की ‘अग्नि’ यानी पाचन क्षमता मंद पड़ जाती है। ऐसे में खानपान में थोड़ी-सी लापरवाही भी पेट संबंधी समस्याएं, सर्दी-जुकाम और संक्रमण का कारण बन सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में हल्का, गर्म और ताजा बना भोजन सबसे बेहतर होता है। मूंग दाल की खिचड़ी, दाल, सूप, उबली या भाप में पकी सब्जियां, लौकी, तोरी, कद्दू और अदरक, जीरा, अजवाइन, हल्दी जैसे मसालों का सेवन पाचन को मजबूत रखने में मदद करता है। दिनभर गुनगुना या उबला हुआ पानी पीना भी लाभकारी माना गया है।
आयुर्वेद बरसात में तली-भुनी चीजें, जंक फूड, बासी भोजन, कच्चा सलाद, पत्तेदार सब्जियां, ठंडे पेय और फ्रिज से निकला भोजन खाने से बचने की सलाह देता है। बाहर का भोजन भी संक्रमण का जोखिम बढ़ा सकता है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार यदि खानपान को मौसम के अनुरूप रखा जाए और भोजन हमेशा ताजा व स्वच्छ हो, तो बरसात के मौसम में होने वाली अधिकांश स्वास्थ्य समस्याओं से बचा जा सकता है। मजबूत पाचन शक्ति ही इस मौसम में बेहतर रोग प्रतिरोधक क्षमता की सबसे बड़ी कुंजी मानी जाती है।
