▪️ बिना सूरज के पनप रही है अनोखी दुनिया

▪️नई दिल्ली
वैज्ञानिकों ने अटलांटिक महासागर की तलहटी के लगभग 1.3 किलोमीटर नीचे एक ऐसी खोज की है, जिसने पृथ्वी पर जीवन की उत्पत्ति और दूसरे ग्रहों पर जीवन की संभावनाओं को लेकर नई उम्मीदें जगा दी हैं। शोधकर्ताओं को समुद्र के नीचे अत्यधिक गर्म, हाइड्रोजन-समृद्ध जल का एक छिपा स्रोत मिला है, जो ‘लॉस्ट सिटी’ नामक रहस्यमयी हाइड्रोथर्मल क्षेत्र को ऊर्जा प्रदान करता है।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस क्षेत्र में जीवन सूर्य के प्रकाश पर नहीं, बल्कि चट्टानों और गर्म जल के बीच होने वाली रासायनिक प्रतिक्रियाओं से मिलने वाली ऊर्जा पर निर्भर करता है। यहां सूक्ष्मजीव, बैक्टीरिया और अन्य जीव बिना प्रकाश के भी जीवित रह रहे हैं, जिससे यह पृथ्वी के सबसे अनोखे पारिस्थितिक तंत्रों में शामिल हो गया है।
वैज्ञानिकों ने समुद्र तल में ड्रिलिंग कर चट्टानों और गर्म जल के नमूनों का अध्ययन किया। जांच में पाया गया कि भूमिगत जल की रासायनिक संरचना ‘लॉस्ट सिटी’ के हाइड्रोथर्मल वेंट्स से निकलने वाले जल से काफी मेल खाती है। इससे संकेत मिलता है कि समुद्र के नीचे एक विशाल छिपा हुआ जलाशय इस पूरे तंत्र को ऊर्जा दे रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज केवल समुद्री विज्ञान तक सीमित नहीं है। इससे यह समझने में मदद मिलेगी कि अरबों वर्ष पहले पृथ्वी पर जीवन की शुरुआत किन परिस्थितियों में हुई होगी। साथ ही, बृहस्पति के उपग्रह यूरोपा और शनि के उपग्रह एन्सेलाडस जैसे बर्फीले पिंडों के भीतर यदि ऐसे ही गर्म जल स्रोत मौजूद हों, तो वहां भी सूक्ष्म जीवन की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। यह खोज भविष्य के अंतरिक्ष अभियानों के लिए भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
