
▪️बीजिंग
ब्रेन-कंप्यूटर इंटरफेस (बीसीआई) तकनीक की वैश्विक दौड़ में चीन ने बड़ी उपलब्धि हासिल करने का दावा किया है। चीन ने दुनिया की पहली व्यावसायिक रूप से स्वीकृत इनवेसिव ब्रेन चिप का सफलतापूर्वक एक मरीज के मस्तिष्क में प्रत्यारोपण कर दिया है। इसके साथ ही चीन इस क्षेत्र में एलन मस्क की कंपनी न्यूरालिंक से एक कदम आगे निकलता दिखाई दे रहा है, क्योंकि न्यूरालिंक अभी अमेरिका में मानव परीक्षणों के चरण में है और उसे व्यापक व्यावसायिक मंजूरी मिलनी बाकी है।
रिपोर्ट के अनुसार, सिक्के के आकार की यह चिप एक ऐसे मरीज के मस्तिष्क में लगाई गई, जो रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट के कारण हाथों की सामान्य गतिविधि खो चुका था। इस तकनीक का उद्देश्य मस्तिष्क के संकेतों को पढ़कर कंप्यूटर या अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों को नियंत्रित करना है, जिससे लकवाग्रस्त मरीजों को भविष्य में रोजमर्रा के कार्य करने में मदद मिल सके।
दूसरी ओर, एलन मस्क की न्यूरालिंक भी इसी दिशा में काम कर रही है। कंपनी का लक्ष्य ऐसे ब्रेन चिप विकसित करना है, जो पक्षाघात, दृष्टिहीनता और अन्य न्यूरोलॉजिकल समस्याओं से जूझ रहे लोगों के जीवन को बेहतर बना सकें। हालांकि, उसकी तकनीक अभी परीक्षण और नियामकीय मंजूरी की प्रक्रिया में है।
विशेषज्ञों का मानना है कि ब्रेन चिप तकनीक भविष्य में चिकित्सा विज्ञान में क्रांतिकारी बदलाव ला सकती है। हालांकि, इसके साथ डेटा सुरक्षा, गोपनीयता, दीर्घकालिक सुरक्षा और नैतिक पहलुओं को लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। ऐसे में यह तकनीक जितनी आशाजनक है, उतनी ही सावधानी और कड़े नियमन की भी मांग करती है।
