
▪️नई दिल्ली
देश में प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता बहाल करने और पेपर लीक जैसी घटनाओं पर प्रभावी रोक लगाने के लिए केंद्र सरकार ने व्यापक परीक्षा सुधार अभियान शुरू किया है। इस दिशा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा इन्फोसिस के सह-संस्थापक नंदन नीलेकणी की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय टास्क फोर्स परीक्षा प्रणाली में तकनीकी और संरचनात्मक बदलावों का खाका तैयार कर रही है। टास्क फोर्स के सामने सबसे बड़ी चुनौती प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों की पहचान और पूरी प्रक्रिया की गोपनीयता बनाए रखना है।
सुधारों के तहत प्रश्नपत्र निर्माण, मॉडरेशन, सुरक्षित डिजिटल भंडारण और परीक्षा केंद्रों तक उसकी आपूर्ति की पूरी प्रक्रिया को अत्याधुनिक तकनीक से सुरक्षित बनाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), एंड-टू-एंड एन्क्रिप्शन, उन्नत साइबर सुरक्षा, डिजिटल ट्रैकिंग और सीमित एक्सेस जैसी व्यवस्थाओं को लागू करने की योजना है। साथ ही प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों का चयन भी अधिक गोपनीय और नियंत्रित तरीके से किया जाएगा, ताकि किसी भी स्तर पर सूचना लीक होने की संभावना समाप्त हो सके।
सरकार परीक्षा सुधार को केवल तकनीकी बदलाव तक सीमित नहीं रखना चाहती। इसी उद्देश्य से लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026 पेश किया गया है। प्रस्तावित संशोधनों में पेपर लीक मामलों की त्वरित जांच, विशेष जांच दल, फास्ट ट्रैक अदालतों और दोषियों के खिलाफ और अधिक कठोर दंड का प्रावधान शामिल है। सरकार का मानना है कि तकनीक, मजबूत कानूनी ढांचे और जवाबदेह व्यवस्था के संयुक्त प्रयास से परीक्षा प्रणाली को अधिक पारदर्शी और भरोसेमंद बनाया जा सकता है।
सरकार का कहना है कि इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य करोड़ों अभ्यर्थियों का विश्वास बहाल करना, निष्पक्ष परीक्षा सुनिश्चित करना और भविष्य में पेपर लीक जैसी घटनाओं पर स्थायी अंकुश लगाना है। टास्क फोर्स की सिफारिशों के आधार पर देश की परीक्षा व्यवस्था में व्यापक और दीर्घकालिक बदलाव लागू किए जाएंगे।
