
- झांसी के मऊरानीपुर क्षेत्र में पहाड़ी पर स्थित केदारेश्वर महादेव मंदिर बुंदेलखंड की आस्था और प्राचीन स्थापत्य का अनूठा संगम है। सावन आते ही यहां श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ती है। करीब 67 किलोमीटर दूर स्थित यह मंदिर चंदेलकालीन स्थापत्य की पहचान माना जाता है। झांसी जिला प्रशासन के अनुसार, मौजूदा पत्थर का मंदिर चंदेल काल में 12वीं शताब्दी में निर्मित हुआ था।
मंदिर की सबसे खास विशेषता गर्भगृह में स्थापित शिवलिंग है, जो नंदी की पीठ पर विराजमान है। मंदिर तक पहुंचने के लिए लगभग 600 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं। पत्थरों पर की गई बारीक नक्काशी आज भी प्राचीन शिल्पकला की कहानी बयां करती है।

• अर्जुन और शिवलिंग से जुड़ी मान्यता
केदारेश्वर मंदिर को लेकर कई पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं। स्थानीय मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण के आदेश पर अर्जुन ने यहां शिवलिंग की स्थापना की थी। वहीं एक अन्य प्रचलित कथा में इसे पांडवों के अज्ञातवास से जोड़ते हुए भीम द्वारा शिवलिंग स्थापित किए जाने की बात कही जाती है। इन कथाओं का उल्लेख श्रद्धालुओं की धार्मिक आस्था और स्थानीय परंपराओं के रूप में किया जाता है।
इस मंदिर से जुड़ी सबसे रहस्यमयी मान्यता इसकी पहली पूजा को लेकर है। कहा जाता है कि सुबह मंदिर के कपाट खुलने से पहले ही भगवान शिव की पूजा हो जाती है। श्रद्धालुओं के बीच यह विश्वास आज भी कौतूहल और आस्था का विषय बना हुआ है।
सावन के सोमवार और प्रदोष के अवसर पर यहां विशेष भीड़ रहती है। दूर-दूर से कांवड़िए पवित्र जल लेकर पहुंचते हैं और केदारेश्वर महादेव का जलाभिषेक करते हैं। इस तरह यह मंदिर बुंदेलखंड की धार्मिक परंपरा, इतिहास और लोकविश्वास को एक साथ समेटे हुए है।
