▪️खाने और औद्योगिक चीनी के लिए अलग कीमत और कोटा तय करने की मांग

• मुंबई। महाराष्ट्र में चीनी की कीमत 60 से 70 रुपए किलो तक पहुंचने से आम उपभोक्ताओं की चिंता बढ़ गई है। त्योहारी सीजन से पहले बढ़ी कीमतों को नियंत्रित करने के लिए राज्य सरकार अब केंद्र के सामने चीनी की अलग-अलग श्रेणियां तय करने का प्रस्ताव रखने जा रही है।
राज्य के सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटील ने मांग की है कि घरेलू खपत और औद्योगिक उपयोग की चीनी को अलग-अलग श्रेणी में रखा जाए। घरेलू उपभोक्ताओं के लिए अलग कोटा निर्धारित कर कम दर पर चीनी उपलब्ध कराने की व्यवस्था की जाए, जबकि बिस्किट, शीतपेय और अन्य उद्योगों में इस्तेमाल होने वाली चीनी के लिए अलग व्यावसायिक दर तय की जाए।
मंत्री पाटील का कहना है कि इस व्यवस्था से घरेलू उपभोक्ताओं को बढ़ती कीमतों से राहत मिल सकती है। चीनी के दाम में लगातार वृद्धि को देखते हुए केंद्र सरकार आयात के विकल्प पर भी विचार कर रही है। महाराष्ट्र सरकार ने गन्ने की एफआरपी और चीनी की एमएसपी को आपस में जोड़ने की मांग भी की है।
पाटील के अनुसार, मौजूदा महंगाई के लिए इथेनॉल नीति को जिम्मेदार ठहराना उचित नहीं है। उन्होंने चीनी की कथित कालाबाजारी को कीमतों में तेजी का प्रमुख कारण बताया। उनके मुताबिक, कुछ समय पहले करीब 37 रुपए किलो मिलने वाली चीनी अब 60 से 70 रुपए किलो तक पहुंच गई है।
