▪️@शैलेन्द्र श्रीवास्तव

29 अगस्त, 2026 कल ‘बयार’ द्वारा आयोजित कजरी उत्सव में शामिल होकर मन को बेहद आनंद मिला। सच कहूं तो आयोजन की भव्यता से कहीं अधिक उसकी आत्मीयता ने मन मोह लिया। पूरे कार्यक्रम की व्यवस्था बेहद शानदार थी और जिस गर्मजोशी से सभी अतिथियों का आवभगत और आदर-सत्कार किया गया, वह सचमुच प्रशंसनीय है।
इस आयोजन में बड़ी संख्या में पत्रकारों ने उपस्थित होकर सांस्कृतिक एकता और आपसी सौहार्द का सुंदर संदेश दिया। इस खूबसूरत संयोजन के लिए अभय जी, आपको बहुत-बहुत बधाई और मुझे इस आयोजन में शामिल करने के लिए हृदय से धन्यवाद।
कजरी की मधुर धुनों के साथ अतिथियों के स्वागत-सत्कार के लिए गमछा, शॉल आदि की व्यवस्था तो थी ही, महिलाओं के लिए महावर, चूड़ी, मेहंदी और झूले की व्यवस्था ने पूरे आयोजन में जैसे घर-आंगन की खुशबू घोल दी थी। मेरी श्रीमती जी और मेरी बेटी ने भी बड़ी रुचि के साथ चूड़ी और मेहंदी का आनंद लिया।
मेरी बिटिया एडवोकेट रुचि दिनभर हाईकोर्ट में व्यस्त थी। अभय जी, आपके कहने पर मैंने उसे भी कार्यक्रम में बुला लिया। वहां पहुंचकर वह इतनी खुश हुई कि काफी देर तक चूड़ी, महावर और मेहंदी वाले स्टॉल के आसपास ही घूमती रही। उसकी खुशी देखकर मुझे भी बेहद आनंद हो रहा था।
सबसे खास बात यह रही कि पूरा आयोजन अपने परिवार में हो रहे घर-आंगन के उत्सव जैसा लगता रहा। ऐसा महसूस हुआ जैसे महिलाओं को अपने मायके का माहौल मिल गया हो; अद्भुत अपनापन, उमंग, गीत-संगीत और स्नेह से भरा हुआ।
मुंबई जैसे महानगर में अवध की लोककला, लोकसंस्कृति और लोकगायन ‘कजरी’ की मिठास और अपनी मिट्टी की खुशबू को जीवंत रखने का यह प्रयास वास्तव में सराहनीय है। ‘बयार’ ने इस सांस्कृतिक कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को अपनी जड़ों और परंपराओं से जोड़ने का सुंदर काम किया है।
आपका यह सांस्कृतिक अभियान निरंतर आगे बढ़ता रहे और ‘बयार’ इसी तरह अपनी संस्कृति की खुशबू फैलाती रहे यही शुभकामना।
‘बयार’ की पूरी टीम को बहुत-बहुत शुभकामनाएं और अभय जी, इस अद्भुत, आत्मीय और हृदयस्पर्शी आयोजन के लिए आपको विशेष रूप से बहुत-बहुत धन्यवाद।
