▪️यूएन की चेतावनी
- मुंबई। मुंबई समेत दुनिया के कई तटीय शहरों के लिए समुद्र का बढ़ता जलस्तर भविष्य में गंभीर संकट बन सकता है। संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की एक रिपोर्ट में भारत के मुंबई और कोलकाता जैसे शहरों को लेकर चिंता जताई गई है। रिपोर्ट के मुताबिक, यदि समुद्र का जलस्तर इसी गति से बढ़ता रहा तो दक्षिण एशिया के निचले इलाकों में रहने वाले लाखों लोगों को अपने घर छोड़ने पड़ सकते हैं।

रिपोर्ट में अनुमान जताया गया है कि इस क्षेत्र में 1.4 करोड़ से अधिक लोगों के घरों के स्थायी रूप से पानी में डूबने का खतरा है। मुंबई की भौगोलिक स्थिति इस खतरे को और गंभीर बनाती है, क्योंकि शहर का बड़ा हिस्सा समुद्र के बेहद करीब और निचले इलाकों में बसा है।
समुद्र का जलस्तर बढ़ने के पीछे ग्लोबल वार्मिंग प्रमुख कारण है। तापमान बढ़ने से ग्लेशियर और बर्फ की चादरें तेजी से पिघल रही हैं। साथ ही गर्म समुद्री पानी फैलता है, जिससे जलस्तर बढ़ता है। 2014 से 2023 के बीच समुद्र का औसत जलस्तर करीब 4.7 मिलीमीटर प्रतिवर्ष बढ़ा, जबकि 2024 में यह वृद्धि करीब 5.9 मिलीमीटर रही।
इसका असर केवल घरों पर नहीं पड़ेगा। सड़क, रेलवे, बिजली, पानी की सप्लाई और बंदरगाह जैसी सुविधाएं भी प्रभावित हो सकती हैं। समुद्री पानी भूजल में मिलने से पीने के पानी का संकट और बाढ़ के कारण स्वास्थ्य संबंधी खतरे भी बढ़ सकते हैं।
