▪️सूर्यकांत उपाध्याय

एक चिड़िया रेगिस्तान में रहती थी। वह बीमार थी, उसके पंख नहीं थे, खाने-पीने को कुछ नहीं था और रहने का कोई ठिकाना भी नहीं था। वह हमेशा दुखी रहती थी।
एक दिन वहाँ से गुजर रहे कबूतर से चिड़िया ने पूछा, ‘तुम कहाँ जा रहे हो?’ कबूतर ने कहा, ‘मैं स्वर्ग जा रहा हूँ।’ चिड़िया ने उससे पूछा, ‘क्या तुम पता कर सकते हो कि मेरी पीड़ा कब समाप्त होगी?’ कबूतर ने उसे आश्वासन दिया और स्वर्ग चला गया।
स्वर्ग के द्वार पर कबूतर ने देवदूत से चिड़िया के बारे में पूछा। देवदूत ने बताया कि उसके जीवन के अगले सात वर्ष भी कठिनाइयों से भरे रहेंगे। कबूतर ने चिड़िया के लिए कोई उपाय पूछा। देवदूत ने कहा, ‘उसे हर परिस्थिति में यह कहते रहने को कहो- भगवान! जो कुछ भी आपने दिया है, उसके लिए आपका शुक्रिया।’
कबूतर ने लौटकर चिड़िया को यह मंत्र बताया। चिड़िया ने परिस्थितियां कैसी भी हों, कृतज्ञता नहीं छोड़ी। गर्म रेत पर गिरने पर भी उसने धन्यवाद दिया, उड़ न पाने पर भी धन्यवाद दिया और प्यास लगने पर भी भगवान को धन्यवाद दिया।
सात दिन बाद कबूतर ने देखा कि चिड़िया के पंख उग आए हैं। पास ही एक पेड़ और पानी का छोटा तालाब भी बन गया था। चिड़िया प्रसन्न होकर गा रही थी।
कबूतर ने देवदूत से इसका कारण पूछा। देवदूत ने बताया कि चिड़िया ने शिकायत करने के बजाय हर परिस्थिति में कृतज्ञता का भाव रखा। इसलिए उसके सात कठिन वर्ष सात दिनों में बदल गए।
हमारे जीवन में भी कृतज्ञता दृष्टिकोण बदल सकती है। जो नहीं है, उस पर ध्यान देने के बजाय जो मिला है, उसके लिए आभारी होना हमें अधिक सकारात्मक और संतुष्ट बनाता है।
• शिक्षा: कृतज्ञता एक शक्तिशाली सकारात्मक भावना है। खुले हृदय से किया गया कृतज्ञता का अभ्यास जीवन के प्रति हमारा दृष्टिकोण बदल सकता है।
