
▪️घर के फ्रिज पर बच्चे की बनाई टेढ़ी-मेढ़ी ड्रॉइंग लगाना भले ही सामान्य पारिवारिक परंपरा लगे, लेकिन मनोविज्ञान के नजरिए से इसका असर बच्चे के व्यक्तित्व पर लंबे समय तक रह सकता है। बच्चे की तस्वीर को घर में प्रमुख स्थान देना उसे यह संदेश देता है कि उसके प्रयास और रचनात्मकता परिवार के लिए महत्वपूर्ण हैं।
मनोवैज्ञानिक एडवर्ड डेसी और रिचर्ड रयान की ‘सेल्फ-डिटरमिनेशन थ्योरी’ के अनुसार बच्चों के विकास में क्षमता, स्वायत्तता और अपनापन महसूस करना अहम है। फ्रिज पर ड्रॉइंग लगाना बच्चे में अपनी क्षमता को लेकर विश्वास बढ़ाने के साथ परिवार से भावनात्मक जुड़ाव भी मजबूत कर सकता है।
इसमें माता-पिता की प्रतिक्रिया की भी बड़ी भूमिका होती है। मनोवैज्ञानिक कैरल ड्वेक और एलिजाबेथ गुंडरसन के शोध के मुताबिक, बच्चे की जन्मजात प्रतिभा की बजाय उसके प्रयास, मेहनत और सीखने की प्रक्रिया की तारीफ करना अधिक उपयोगी है। इससे ‘ग्रोथ माइंडसेट’ विकसित होता है। बच्चा यह समझने लगता है कि किसी काम में बेहतर होने के लिए अभ्यास और प्रयास जरूरी हैं।
मिसाल के तौर पर, केवल यह कहना कि ‘तुम बहुत प्रतिभाशाली हो’ अपेक्षाकृत कम प्रभावी हो सकता है। इसके बजाय ‘तुमने इसे बनाने में बहुत मेहनत की’ कहना बच्चे को प्रयास जारी रखने के लिए प्रेरित करता है।
फ्रिज पर लगी बच्चों की तस्वीरें परिवार की यादों का हिस्सा भी बन जाती हैं। कुछ सप्ताह बाद तस्वीर बदल सकती है, लेकिन उससे जुड़ी खुशी और अपनापन बच्चे के मन में लंबे समय तक रह सकता है।
इसलिए अगली बार बच्चे की बनाई तस्वीर को फ्रिज पर लगाते समय इसे महज सजावट न समझें। यह छोटा-सा कदम उसके आत्मसम्मान, सीखने की इच्छा और परिवार में अपने महत्व की भावना को मजबूत करने में योगदान दे सकता है।
