- सनातन धर्म पर टिप्पणियों का शास्त्रों के आधार पर जवाब देने की तैयारी
- शिवांश नारायण द्विवेदी को बनाया प्रतिनिधि

▪️ वाराणसी। सनातन धर्म और हिंदू देवी-देवताओं पर की गई कथित आपत्तिजनक टिप्पणियों को लेकर शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने संत रामपाल को आमने-सामने शास्त्रार्थ की खुली चुनौती दी है। उन्होंने इस बहस में सनातन धर्म का पक्ष रखने के लिए शिवांश नारायण द्विवेदी को अपना प्रतिनिधि नियुक्त किया है।
केदारघाट स्थित श्रीविद्यामठ में आयोजित प्रेस वार्ता में स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने रामपाल की पुस्तकों ‘ज्ञान गंगा’ और ‘जीने की राह’ में धार्मिक परंपराओं, हिंदू देवी-देवताओं, पर्वों और वैदिक विवाह संस्कार को लेकर व्यक्त विचारों पर आपत्ति जताई। उन्होंने आरोप लगाया कि इन पुस्तकों में वेद, पुराण और धर्मशास्त्रों के प्रमाणों को गलत तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद की ओर से कहा गया कि धार्मिक विषयों पर उठाए गए सवालों का जवाब शास्त्रों के प्रमाण और तर्क के आधार पर दिया जाना चाहिए। उन्होंने रामपाल को किसी तटस्थ स्थान पर खुली बहस के लिए सामने आने की चुनौती दी।
प्रेस वार्ता के दौरान शिवांश नारायण द्विवेदी द्वारा संकलित पुस्तक ‘रामपाल का रसातल गमन’ का विमोचन भी किया गया। आयोजकों के अनुसार, इस पुस्तक में सनातन धर्म और धर्मशास्त्रों पर उठाए गए सवालों का शास्त्रीय प्रमाणों के आधार पर जवाब देने का प्रयास किया गया है।
इस दौरान रामपाल की पुस्तकों के प्रकाशन और वितरण के साथ लखनऊ में हुई कानूनी कार्रवाई तथा न्यायालय में दाखिल याचिकाओं का भी उल्लेख किया गया। कार्यक्रम की जानकारी शंकराचार्य के मीडिया प्रभारी संजय पांडेय ने दी।
