▪️शोध में खुलासा: भोजन ही नहीं, आश्रय और सुरक्षा के लिए भी कीटों पर निर्भर हैं कई जीव
- मुंबई। कीटों की घटती संख्या और उनके विलुप्त होने का खतरा पूरी खाद्य शृंखला को प्रभावित कर सकता है। इसका सीधा असर पक्षियों, मेंढकों, मछलियों और अन्य वन्यजीवों के अस्तित्व पर पड़ने की आशंका है। एक नए अध्ययन में सामने आया है कि कीट केवल दूसरे जीवों का भोजन नहीं हैं, अपितु उनके आश्रय, सुरक्षा और स्वास्थ्य में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

शोधकर्ताओं ने पिछले 75 वर्षों में प्रकाशित करीब 300 शोधों का विश्लेषण कर कीटों के व्यापक पारिस्थितिक महत्व को रेखांकित किया है। यह अध्ययन अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका ‘नेचर रिव्यूज बायोडायवर्सिटी’ में प्रकाशित हुआ है।
अध्ययन के अनुसार, कुछ तोते घोंसले बनाने के लिए दीमकों के टीलों का इस्तेमाल करते हैं। वहीं, कुछ विषैले मेंढक कीटों से ऐसे रासायनिक तत्व प्राप्त करते हैं, जो उन्हें शिकारियों से बचाते हैं। चिंपैंजी भी घावों पर कीटों का उपयोग करते देखे गए हैं। इससे स्पष्ट होता है कि प्रकृति में कीटों की भूमिका भोजन उपलब्ध कराने से कहीं अधिक व्यापक है।
कीट जैविक पदार्थों के विघटन और मिट्टी की उर्वरता बनाए रखने में भी योगदान देते हैं। उनकी संख्या में गिरावट से प्राकृतिक प्रक्रियाएं प्रभावित हो सकती हैं और पारिस्थितिकी तंत्र का संतुलन बिगड़ सकता है।
विशेषज्ञों ने कीटों के संरक्षण के लिए उनके प्राकृतिक आवासों की रक्षा और स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप प्रभावी उपाय अपनाने पर जोर दिया है। कीटों का संरक्षण केवल छोटी प्रजातियों को बचाने तक सीमित नहीं है, यह संपूर्ण जैव विविधता और पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने के लिए भी आवश्यक है।
