▪️टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग से लेकर सलमान खान को मिल रही धमकियों तक, फिल्म उद्योग में अंडरवर्ल्ड की दखलंदाजी का पुराना इतिहास फिर चर्चा में

मुंबई की फिल्मी दुनिया बाहर से जितनी चमकदार दिखाई देती है, उसके पीछे का एक अंधेरा पक्ष भी बार-बार सामने आता रहा है। करोड़ों के बजट, बड़े सितारे और बॉक्स ऑफिस की कमाई के बीच सुरक्षा का सवाल एक बार फिर खड़ा हो गया है। फिल्म जगत से जुड़े लोगों को निशाना बनाने की हालिया घटनाओं ने पुराने दौर की यादें ताजा कर दी हैं, जब अंडरवर्ल्ड की धमकियां फिल्म निर्माताओं और कलाकारों के लिए बड़ी चुनौती बन गई थीं।

हाल ही में अभिनेता टाइगर श्रॉफ की बीएमडब्ल्यू कार को जुहू के पुष्पा पार्क के पास तीन बाइक सवार बदमाशों ने घेरकर गोलियां चलाईं। इस हमले में टाइगर बाल-बाल बच गए, जबकि उनके ड्राइवर फिरदौस के हाथ में गोली लगी और एक ऑटो चालक भी घायल हो गया। बताया गया कि टाइगर खुद अपने घायल ड्राइवर को अस्पताल लेकर पहुंचे। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की मदद से राजस्थान के कोटा रेलवे स्टेशन से तीन संदिग्धों को पकड़ा। इस बीच सोशल मीडिया पर लॉरेंस बिश्नोई गिरोह के नाम से हमले की जिम्मेदारी लेने का दावा भी सामने आया। हालांकि, ऐसे दावों की पुष्टि जांच के निष्कर्षों से ही हो सकती है।
इस घटना ने फिल्म उद्योग की सुरक्षा व्यवस्था पर फिर सवाल खड़े कर दिए हैं। इससे पहले 1 फरवरी 2026 को फिल्म निर्माता रोहित शेट्टी के घर के बाहर भी गोलीबारी हुई थी। उस मामले में भी लॉरेंस बिश्नोई नेटवर्क से जुड़े लोगों की भूमिका की चर्चा सामने आई थी।
- सलमान खान की सुरक्षा सुर्खियों में
अभिनेता सलमान खान लंबे समय से धमकियों के निशाने पर हैं। वर्ष 1998 के काले हिरण शिकार मामले के बाद लॉरेंस बिश्नोई की ओर से उन्हें धमकियां मिलने का सिलसिला शुरू हुआ। वर्ष 2018 में बिश्नोई ने सलमान को खुलेआम धमकी दी थी। इसके बाद 2022 में उनके घर के पास धमकी भरा पत्र मिला और 2023 में ईमेल के जरिए धमकी दी गई।
जांच एजेंसियों ने सलमान के पनवेल स्थित फार्महाउस की रेकी किए जाने की साजिश का भी पता लगाया। 14 अप्रैल 2024 को बांद्रा स्थित गैलेक्सी अपार्टमेंट के बाहर बाइक सवार हमलावरों ने गोलीबारी की। घटना के बाद उनकी सुरक्षा बढ़ा दी गई। इसके बावजूद फिल्म जगत में यह सवाल बना हुआ है कि नामचीन हस्तियों को निशाना बनाने की कोशिशों पर स्थायी रोक कैसे लगेगी।

- जब फिल्मों के कारोबार पर थी अंडरवर्ल्ड की नजर
बॉलीवुड और संगठित अपराध के बीच टकराव की कहानी नई नहीं है। खासकर 1990 के दशक में मुंबई में दाऊद इब्राहिम के नेटवर्क का प्रभाव फिल्म उद्योग के लिए गंभीर चिंता का विषय बन गया था। फिल्मों में बड़े निवेश, सितारों की लोकप्रियता और देश-विदेश में होने वाली कमाई ने इस कारोबार को आपराधिक गिरोहों की दिलचस्पी का केंद्र बना दिया।
कभी फिल्म निर्माण के लिए धन मुहैया कराने के बहाने दखल देने की कोशिश होती, तो कभी निर्माताओं और कलाकारों से फिरौती मांगी जाती। धमकियों का मकसद कई बार आर्थिक दबाव बनाना होता था। जो लोग ऐसी मांगों के आगे झुकने को तैयार नहीं होते, उनके लिए खतरा बढ़ जाता था। नतीजतन, फिल्म बनाना केवल रचनात्मकता और व्यावसायिक जोखिम तक सीमित नहीं रह गया था; सुरक्षा भी एक बड़ी चिंता बन गई थी।
12 अगस्त 1997 को टी-सीरीज के संस्थापक गुलशन कुमार की मुंबई में मंदिर से लौटते समय गोली मारकर हत्या कर दी गई। दिनदहाड़े हुए इस हत्याकांड ने पूरे देश को झकझोर दिया। मामले की जांच में अंडरवर्ल्ड से जुड़े लोगों के नाम सामने आए और अबू सलेम का नाम भी इस प्रकरण से जुड़ा। उसी वर्ष निर्माता मुकेश दुग्गल की अंधेरी स्थित उनके कार्यालय में गोली मारकर हत्या कर दी गई। निर्देशक राजीव राय पर भी हमला हुआ, हालांकि वे बच गए।
21 जनवरी 2000 को निर्माता-निर्देशक राकेश रोशन पर सांताक्रूज स्थित उनके कार्यालय के बाहर गोलियां चलाई गईं। वे घायल हुए, लेकिन उनकी जान बच गई। उस समय उनकी फिल्म ‘कहो ना… प्यार है’ सफल हो चुकी थी। हमले को अंडरवर्ल्ड की कथित वसूली से जोड़कर देखा गया और इस घटना ने फिल्म जगत में सुरक्षा को लेकर चिंता और गहरी कर दी।

- डर कायम है!
आज फिल्म उद्योग का स्वरूप बदल चुका है। सुरक्षा व्यवस्था मजबूत हुई है और जांच एजेंसियां ऐसे मामलों में कार्रवाई करती हैं। फिर भी गोलीबारी और धमकियों की खबरें सामने आने पर पुराना भय लौट आता है। पर्दे पर नायक हर संकट से लड़कर जीत हासिल कर लेता है, लेकिन वास्तविक जीवन में सुरक्षा का भरोसा केवल लोकप्रियता से नहीं मिलता। इसके लिए अपराधियों के नेटवर्क पर प्रभावी कार्रवाई, समयबद्ध जांच और फिल्म जगत से जुड़े लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करना जरूरी है।
