
▪️मुंबई
महंगे किराये और कार्यालयों के बढ़ते खर्च के बीच कंपनियों का रुझान अब को-वर्किंग स्पेस यानी साझा कार्यालयों की ओर तेजी से बढ़ रहा है। अनारॉक ग्रुप की रिपोर्ट के अनुसार, जनवरी से सितंबर 2026 के दौरान देश में किराये पर ली गई कुल 4.29 करोड़ वर्गफुट कार्यालयीन जगह में से 26 प्रतिशत हिस्सेदारी को-वर्किंग स्पेस की रही। पिछले साल यह आंकड़ा 23 प्रतिशत था।
को-वर्किंग स्पेस की लोकप्रियता के पीछे कम खर्च, आधुनिक सुविधाएं और जरूरत के अनुसार जगह लेने की सुविधा प्रमुख कारण हैं। इससे कंपनियों को स्वतंत्र कार्यालय स्थापित करने और उनके रखरखाव पर भारी रकम खर्च करने से राहत मिलती है।
रिपोर्ट के मुताबिक, कार्यालयीन जगह के सौदों में बेंगलुरु 1.19 करोड़ वर्गफुट के साथ पहले स्थान पर रहा। हैदराबाद में 88 लाख और दिल्ली में 73 लाख वर्गफुट जगह के सौदे हुए। हालांकि, पुणे और चेन्नई में कार्यालयीन जगह की मांग में गिरावट दर्ज की गई।
इस बीच, कार्यालयों का औसत किराया सालाना आधार पर 9 प्रतिशत बढ़कर 97 रुपये प्रति वर्गफुट पहुंच गया है।
