▪️ प्रशांत महासागर का तापमान सामान्य से 3.8 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ने का अनुमान
▪️ 2026 के अंत में चरम पर पहुंच सकती है मौसमी स्थिति

• मुंबई। दुनिया पर भीषण गर्मी, सूखे और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (डब्ल्यूएमओ) ने चेतावनी दी है कि इस वर्ष विकसित हो रही एल नीनो की स्थिति असाधारण रूप से तीव्र हो सकती है। संगठन के ताजा अनुमान के अनुसार, नवंबर 2026 से जनवरी 2027 के बीच उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर की सतह का तापमान सामान्य से 3.8 डिग्री सेल्सियस तक अधिक हो सकता है।
डब्ल्यूएमओ की महासचिव सेलेस्टे साउलो ने कहा कि एल नीनो की संभावित तीव्रता पिछले चार दशकों से इस्तेमाल किए जा रहे निगरानी मानकों के दायरे से भी आगे जा सकती है। इसके 2026 के अंत तक चरम पर पहुंचने की आशंका है। इसका असर अगले वर्ष भी लंबे समय तक महसूस किया जा सकता है।
- मौसम का बिगड़ सकता है संतुलन
एल नीनो प्रशांत महासागर के मध्य और पूर्वी हिस्सों में समुद्र की सतह का तापमान असामान्य रूप से बढ़ने की प्राकृतिक जलवायु प्रक्रिया है। इसका प्रभाव दुनिया के अनेक क्षेत्रों के तापमान, वर्षा और मौसमी परिस्थितियों पर पड़ता है।
डब्ल्यूएमओ के अनुमान के मुताबिक, इस बार एल नीनो के कारण कई क्षेत्रों में गर्मी के नए रिकॉर्ड बन सकते हैं। कुछ इलाकों में लंबे समय तक सूखे की स्थिति पैदा हो सकती है, जबकि दूसरे क्षेत्रों में भारी बारिश और बाढ़ का खतरा बढ़ सकता है। इसका असर खेती, जल उपलब्धता, खाद्य सुरक्षा और आम जनजीवन पर पड़ने की आशंका है।

- अगले साल तक रह सकता है असर
एल नीनो का प्रभाव केवल समुद्र तक सीमित नहीं रहता। समुद्र और वायुमंडल के बीच होने वाले बदलाव दूर-दराज के क्षेत्रों में भी मौसम का रुख बदल सकते हैं। इस बार संभावित तीव्रता को देखते हुए सरकारों और आपदा प्रबंधन एजेंसियों के लिए समय रहते तैयारी करना महत्वपूर्ण होगा।
भारत के लिए भी इस घटनाक्रम पर नजर रखना जरूरी है, क्योंकि एल नीनो का संबंध मानसून की परिस्थितियों से रहा है। हालांकि, इसके आधार पर भारतीय मानसून में कमी या किसी खास क्षेत्र में सूखे की निश्चित भविष्यवाणी नहीं की जा सकती। वास्तविक असर अन्य जलवायु परिस्थितियों और क्षेत्रीय मौसम प्रणालियों पर भी निर्भर करेगा।
