- मुंबई। प्रख्यात कथाकार सूर्यबाला ने कहा कि लेखक बनना आसान नहीं है। यह विधाता की ओर से मिली सौगात है, जिसे सुरक्षित रखना हमारी जिम्मेदारी है। विपरीत परिस्थितियों में भी रचनात्मकता बनाए रखना जरूरी है। वे ‘सृजन के रंग’ संस्था के वार्षिकोत्सव पर आयोजित सम्मान समारोह एवं कवि सम्मेलन को संबोधित कर रही थीं। उन्हें सृजन विभूति सम्मान से सम्मानित किया गया।

कथाकार एवं पत्रकार हरीश पाठक ने कहा कि विपरीत परिस्थितियां ही लेखक को गढ़ती हैं। उनके पिता नहीं चाहते थे कि डॉक्टर और इंजीनियरों वाले परिवार में कोई लेखक बने, लेकिन उन्हें शब्दों से मोहब्बत थी। कहानी उनका पहला प्यार रही। अंततः उनके पिता ही उनके आदर्श बने। उन्हें सृजन गौरव सम्मान प्रदान किया गया।

इस अवसर पर विजय पंडित को सृजन रंग और शैलेश श्रीवास्तव को सृजन श्री सम्मान दिया गया। संस्था की अध्यक्ष डॉ. कनकलता तिवारी ने संस्था का परिचय दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता देवमणि पांडेय ने की।
समारोह में कविता ए झा की ‘अशोक वाटिका’, अमनदीप गुजराल की ‘कुछ नहीं अनकहा’ और डॉ. कनकलता तिवारी की ‘धूप का सफर’ पुस्तकों का लोकार्पण हुआ।

दो सत्रों में आयोजित कवि सम्मेलन में कमलेश पाठक, श्रीधर मिश्र, ओमप्रकाश तिवारी, अनिल पुरब, रोशनी किरण, सीमा त्रिवेदी, प्रदीप मिश्र, जागृति सिन्हा, रीमा राय सिंह, लक्ष्मी यादव और जया आनंद सहित अन्य कवियों ने रचनाएं प्रस्तुत कीं।
