
▪️मुंबई
महाराष्ट्र में मानसून के बाद बांधों में जल भंडारण की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। पिछले साल की तुलना में इस बार बांधों में पानी का भंडार काफी कम है। इससे आने वाले महीनों में पेयजल आपूर्ति, खेती की सिंचाई और औद्योगिक जरूरतों को पूरा करने की चुनौती बढ़ सकती है।
जल संसाधन विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 15 अक्टूबर 2026 तक राज्य के बांधों में औसतन 69.8 प्रतिशत पानी उपलब्ध था। पिछले साल इसी अवधि में जल भंडारण करीब 90 प्रतिशत था। इस अंतर से आगामी गर्मियों में पानी की उपलब्धता को लेकर चिंता बढ़ गई है।
राज्य के सभी क्षेत्रों में जल भंडारण की स्थिति एक जैसी नहीं है। मराठवाड़ा में स्थिति अधिक गंभीर है।
छत्रपति संभाजीनगर संभाग के 931 बांधों में केवल 41.14 प्रतिशत पानी शेष है। इसके मुकाबले अमरावती संभाग में 58.39 प्रतिशत, नागपुर में 63.31 प्रतिशत, नासिक में 77.95 प्रतिशत, पुणे में 80.30 प्रतिशत और कोंकण में 86.93 प्रतिशत जल भंडारण दर्ज किया गया।
अक्टूबर में बढ़ती गर्मी के कारण पानी का वाष्पीकरण भी तेजी से हो रहा है। इसके अलावा पेयजल, सिंचाई और उद्योगों के लिए पानी की मांग तथा बांधों से छोड़े जाने वाले पानी का असर भी जल भंडारण पर पड़ रहा है।
