
● काठमांडू
नेपाल को विश्व का सबसे पर्वतीय देश कहा जाता है क्योंकि इसका अधिकांश भूभाग हिमालय की ऊँची श्रेणियों में समाया हुआ है। ऊँचे-खड़े पहाड़, गहरी घाटियाँ, हिम से ढकी धाराएँ और बादलों को छूती चोटियाँ, ये सब मिलकर नेपाल को धरती के सबसे रोमांचक प्राकृतिक परिदृश्यों में शामिल करते हैं। यही कारण है कि दुनिया की 10 सर्वोच्च पर्वत चोटियों में से 8 नेपाल में स्थित हैं, जिनमें विश्व की सबसे ऊँची चोटी माउंट एवरेस्ट भी शामिल है।
नेपाल की यह पर्वतीय पहचान लाखों वर्ष पुराने भूगर्भीय परिवर्तन का परिणाम है। भारतीय प्लेट जब यूरोशियन प्लेट से टकराई तो भूमि ऊपर उठती चली गई और हिमालय जैसी विशाल पर्वत-शृंखला बनी। आज नेपाल का लगभग 75 प्रतिशत भूभाग पहाड़ी या पर्वतीय है, जिस कारण यह पृथ्वी के सबसे ऊँचे और सबसे खड़े देशों में गिना जाता है। तराई की 60 मीटर की ऊँचाई से लेकर 8,848.86 मीटर ऊँचे एवरेस्ट तक, कुछ ही सौ किलोमीटर में ऊँचाई का यह तीव्र परिवर्तन नेपाल को अद्वितीय बनाता है।

माउंट एवरेस्ट अपने बर्फीले ढालों और कठिन मार्गों के कारण दुनिया भर के पर्वतारोहियों का सपना है। इसी ने नेपाल के पर्यटन उद्योग को वैश्विक पहचान दी और हजारों लोगों को आजीविका प्रदान की।
कंचनजंघा (8,586 मीटर) नेपाल–भारत सीमा पर स्थित एक दूरस्थ और रहस्यमय पर्वत है, जिसे स्थानीय लोग देवताओं का निवास मानते हैं।
ल्होत्से (8,516 मीटर) अपनी खड़ी हिमभित्तियों और कठिन चढ़ाई मार्गों के लिए प्रसिद्ध है, जबकि मकालू (8,485 मीटर) अपनी त्रिकोणीय आकृति और अनिश्चित मौसम के कारण सबसे चुनौतीपूर्ण चोटियों में गिना जाता है।
चो ओयू (8,188 मीटर) अपेक्षाकृत सरल मार्गों वाला उच्च पर्वत है, और इसलिए एवरेस्ट की तैयारी करने वाले पर्वतारोही अक्सर इसे चुनते हैं।

नेपाल को पृथ्वी का सबसे “ऊँचाई-समृद्ध” देश कहा जाता है, क्योंकि इतने कम क्षेत्र में इतने अधिक ऊँचे पर्वत कहीं और नहीं मिलते। यही कारण है कि वैज्ञानिक, अन्वेषक, ट्रेकर और पर्वतारोही लगातार यहाँ आते रहते हैं।
हिमालय आज भी हर वर्ष कुछ मिलीमीटर बढ़ रहे हैं क्योंकि नीचे की टेक्टोनिक प्लेटें अब भी एक-दूसरे को धकेल रही हैं। इसलिए यह पर्वत-शृंखला भूगर्भीय रूप से युवा और सक्रिय मानी जाती है।
नेपाल में पर्वत केवल प्राकृतिक संरचनाएँ नहीं बल्कि सांस्कृतिक आस्था का आधार भी हैं। कई चोटियों को देवस्थल माना जाता है, पर्वतारोहण से पहले प्रार्थना की जाती है और पर्वतीय लोककथाएँ पीढ़ियों से आगे बढ़ती आती हैं। प्रकृति, संस्कृति और रोमांच, इन तीनों का संगम नेपाल को विश्व की वास्तविक पर्वत-राजधानी बनाता है।
