■ वैज्ञानिकों ने ‘जिंक स्पार्क’ घटना की पुष्टि की

● लंदन
जीवन की शुरुआत को समझने की दिशा में वैज्ञानिकों ने एक अनोखी और रोमांचक खोज की है। शोधकर्ताओं ने पाया है कि जब कोई शुक्राणु अंडाणु को निषेचित करता है, तो उसी क्षण अंडाणु से एक सूक्ष्म सी चमक निकलती है। इस घटना को वैज्ञानिक भाषा में ‘जिंक स्पार्क’ कहा गया है, क्योंकि यह चमक अंडाणु के भीतर से निकलने वाले जिंक आयनों के कारण उत्पन्न होती है।
यह चमक सामान्य आँखों से नहीं देखी जा सकती; इसे देखने के लिए अत्याधुनिक हाई-पावर माइक्रोस्कोप और विशेष वैज्ञानिक तकनीकों की आवश्यकता होती है। वैज्ञानिकों ने सबसे पहले इस घटना को चूहों के अंडाणुओं में देखा था, जिसके बाद यह घटना मानव अंडाणुओं में भी दर्ज की गई। शोधों में पाया गया कि जैसे ही अंडाणु सक्रिय होता है, वह जिंक को तीव्रता से बाहर छोड़ता है, जिससे माइक्रोस्कोप के माध्यम से एक छोटी-सी झिलमिलाहट दिखाई देती है।
वैज्ञानिकों के अनुसार यह ‘जिंक स्पार्क’ इस बात का संकेत है कि निषेचन प्रक्रिया सफलतापूर्वक शुरू हो चुकी है। इसे जीवन की पहली जैव-रासायनिक प्रतिक्रिया माना जा रहा है, जो एक अदृश्य लेकिन अत्यंत महत्वपूर्ण घटना को प्रकाश में लाती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यह खोज न केवल प्रजनन विज्ञान को नई दिशा देगी बल्कि भविष्य में अंडाणुओं की गुणवत्ता पहचानने तथा सफल निषेचन की संभावनाओं का आकलन करने में भी उपयोगी हो सकती है। वैज्ञानिक इसे ‘जीवन की शुरुआत का सूक्ष्म प्रकाश-चित्र’ मानते हैं, जिसे पहली बार इतने स्पष्ट रूप में देखा गया है।
बता दें उपरोक्त शोध का नेतृत्व नॉर्थवेस्टर यूनिवर्सिटी की टीम ने किया। इसके मुख्य वैज्ञानिकों में टेरेसा के. वुडरफ हैं, जो ओवेरियन बायोलॉजी की विशेषज्ञ हैं। अन्य प्रमुख वैज्ञानिक हैं थॉमस वी. ओ’हैलोरन, जो केमिस्ट्री के प्रोफेसर हैं।मानव अंडाणुओं में ‘जिंक स्पार्क’ की खोज में फ्रांसेस्का डंकन पहली लेखिका रही हैं। इस शोध में नैन झांग ₹, एमिली क्यू और अन्य वैज्ञानिकों ने भी योगदान दिया है।
