
दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ घरेलू टेस्ट सीरीज में 0-2 की हार के बाद टीम इंडिया के मुख्य कोच गौतम गंभीर लगातार आलोचनाओं के घेरे में हैं। सोशल मीडिया से लेकर क्रिकेट जगत तक, उन पर टेस्ट क्रिकेट की लय बिगाड़ने के आरोप लगाए जा रहे हैं। लगातार प्रयोग, बल्लेबाजी क्रम में अनिश्चित बदलाव, विशेषज्ञ खिलाड़ियों को नजरअंदाज करना और ऑलराउंडरों पर अत्यधिक भरोसा।
इन सबके बीच गंभीर का कहना है कि टीम परिवर्तन के दौर से गुजर रही है और यही असली ट्रांजिशन फेज है।
लेकिन इसी बहस में दक्षिण अफ्रीका के महान पूर्व बल्लेबाज एबी डिविलियर्स ने एक अहम टिप्पणी की है। उनका कहना है कि क्रिकेट में एक इमोशनल कोच का होना हमेशा सही नहीं माना जाता।
डिविलियर्स ने कहा, “नेतृत्व की बात आती है तो मैं यह नहीं जानता कि गंभीर ड्रेसिंग रूम में कैसे हैं। मैं उन्हें एक भावुक खिलाड़ी के रूप में जानता रहा हूं। और अगर कोचिंग में भी वही भावनात्मक प्रतिक्रिया रहती है, तो इसे आदर्श नेतृत्व नहीं माना जाता।”
हालांकि उन्होंने साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि एक भावुक खिलाड़ी का भावुक कोच होना जरूरी नहीं।
डिविलियर्स के शब्दों में “यह मान लेना ठीक नहीं कि वह पर्दे के पीछे भी वैसे ही होंगे। क्रिकेट में कोई तरीका पूरी तरह सही या गलत नहीं होता। कुछ खिलाड़ी उन कोचों के साथ सहज होते हैं जिनसे उन्होंने खेला है, जबकि कुछ उन कोचों के साथ बेहतर जुड़ते हैं जिनके पास लंबा कोचिंग अनुभव हो, भले ही उन्होंने साथ न खेला हो।”
