■ पहली डिजिटल गणना की तैयारी तेज

● नई दिल्ली
भारत की जनगणना 2027 के पहले चरण के शुभारंभ में अब तीन महीने से भी कम समय शेष है। इसे ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार ने तैयारियां तेज कर दी हैं। अधिकारी इसे दुनिया के सबसे बड़े प्रशासनिक अभियानों में एक बता रहे हैं।
पहला चरण-गृह सूचीकरण और आवास जनगणना अप्रैल से सितंबर 2026 के बीच होगा। इसकी रूपरेखा को अंतिम रूप देने के लिए उप-जिला, जिला और राज्य स्तर पर व्यापक चर्चाएं की जा चुकी हैं। हाल ही में पूर्व-परीक्षण अभ्यास के सफल समापन के बाद तैयारियों को और गति मिली है। रजिस्ट्रार जनरल एवं जनगणना आयुक्त मृत्युंजय कुमार नारायण ने इसे भारत की पहली पूर्ण डिजिटल जनगणना की दिशा में अहम कदम बताया है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार इस अभियान में लाखों फील्ड कर्मी हर घर तक पहुंचेंगे और डेटा संग्रह के लिए मोबाइल ऐप का उपयोग किया जाएगा। सुरक्षा और डिजिटल प्रबंधन के लिए विशेष इंतजाम किए जा रहे हैं। जनगणना 2027 दो चरणों में होगी। दूसरा चरण, जनसंख्या गणना, फरवरी 2027 में संपन्न होगा। हालांकि लद्दाख, जम्मू-कश्मीर, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के बर्फीले क्षेत्रों में यह गणना सितंबर 2026 में कराई जाएगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 12 दिसंबर को 11,718.24 करोड़ रुपये की लागत से जनगणना 2027 को मंजूरी दी है। इसमें जाति गणना भी शामिल होगी। यह स्वतंत्रता के बाद आठवीं और कुल 16वीं जनगणना होगी।
इस महाअभियान में लगभग 30 लाख फील्ड वर्कर और 18,600 तकनीकी कर्मी शामिल होंगे, जिससे 1.02 करोड़ से अधिक मानव-दिवस का रोजगार सृजित होगा। अधिकांश गणनाकर्मी सरकारी स्कूलों के शिक्षक होंगे, जो अपने नियमित कार्यों के साथ यह जिम्मेदारी निभाएंगे।
