● पद, पैसा, बल, जवानी किसी का अभिमान मत करना
● भगवान का भजन करने वाला मारने और मरने से बचता है
● माता-पिता, गुरुजनों और भगवान की कभी निंदा नहीं करनी चाहिए

खारघर । नवी मुंबई
सामर्थ्यवान बनना आवश्यक है। लेकिन अपनी भक्ति, अपने पद, पैसा, बल, परिवार, जवानी किसी का कभी भी अभिमान मत करना। ये सब पहले किसी और के पास थे। कल किसी और के पास होंगे। इसमें से कुछ भी टिकाऊ नहीं है। टिकाऊ है तो केवल भगवान की भक्ति और कुछ भी टिकाऊ नहीं है। भगवान सारे अभिमान को खा लेते हैं यानि भगवान अभिमान की सारी चीज छीन लेते हैं। इसीलिए बड़े-बड़े काम करो तो भूल जाओ। उसका उल्लेख मत करो। भगवान का दास बने रहो। वही बचाता है। भगवान का भजन करने वाला मारने से भी बचता है और मरने से भी बचता है। भगवान की कथा का श्रवण नरक के दरवाजे बंद कर देता है। ज्ञान के ये पावन वचन सुप्रसिद्ध कथावाचक श्रद्धेय शांतिदूत श्री देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज के मुखारविंद से प्रस्फुटित हुए हैं। महाराजश्री के सानिध्य में यहां नवी मुंबई के खारघर में सेक्टर 28 स्थित कॉरपोरेट पार्क ग्राउंड में शिव महापुराण कथा का श्रवण करा रहे हैं।
श्रद्धालुओं की बड़ी संख्या को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि काम और क्रोध को अपने स्वभाव पर हावी मत होने दो। कामी व्यक्ति की कामना पूरी नहीं होती है तो उसे सबसे अधिक क्रोध आता है इसीलिए आज हिंसा अधिक हो रही है। महाराजश्री ने कहा कि काम को केवल भगवान ही काबू में रख सकते हैं। युवाओं की ओर मुखातिब होते हुए उन्होंने कहा कि बड़ों की बात जब बच्चों को बुरी लगने लगे तो समझ लेना बच्चों का बुरा दिन आरंभ हो गया है। बड़ों के बराबर में नहीं बैठना चाहिए। बड़ों का आदर करना चाहिए। भरतजी के गुणों से सीखो। रामजी वनवास की अवधि में जब धरती पर थे तब भरतजी जमीन में गड्ढा करके धरातल से कुछ नीचे रहते थे। गुरुओं, पिता या किसी भी बड़े की बराबरी में नहीं बैठना चाहिए। माता-पिता के बच्चे बड़े हो जाएं तो उन्हें बैरागी सा बन जाना चाहिए और भगवान की भावना रखनी चाहिए। भगवान की भावना चिता तक साथ रहनी चाहिए।

●बच्चों को संस्कार दें, नववर्ष पर कीर्तन करें
महाराजश्री ने कहा कि आज के बड़े, बुजुर्ग और माता-पिता खुद मोबाइल में भिड़े रहते हैं। उन्हें चाहिए के बच्चों को संस्कार दें। उन्हें भक्ति का मार्ग दिखाएं। उन्हें कहें कि वे भगवान के समक्ष दीपक जलाएं। इन्हीं संस्कारों से जीवन में प्रकाश आता है। नववर्ष नशे में, डिस्को में या अल्कोहल में नहीं होना चाहिए। नए वर्ष का स्वागत भगवान के कीर्तन के साथ होना चाहिए।
● ठाकुरजी ने खूब घुमाया बल्ला

शुक्रवार की सुबह नवी मुंबई में पूज्य देवकीनंदन ठाकुर महाराज ने युवाओं के साथ क्रिकेट खेलकर खेल भावना, उत्साह और संस्कारों का अद्भुत संगम प्रस्तुत किया। ठाकुर महाराज के नेतृत्व में वृंदावन टीम ने श्रद्धालु युवाओं की मुंबई टीम को तीन मैचों में हरा दिया। महाराजश्री ने बल्लेबाजी, गेंदबाजी और फील्डिंग तीनों का शानदार प्रदर्शन किया और उन्हें मैन ऑफ द सीरीज का पुरस्कार भी मिला।महाराजश्यरी ने कहा कि यह किसी की हार नहीं बल्कि खेल भावना की जीत है। महाराजश्री ने सभी खिलाड़ियों को आशीर्वाद दिया.और खेल के माध्यम से सनातन संस्कार, अनुशासन और सकारात्मक जीवन मूल्यों का संदेश भी दिया।
