● शिवमहापुराण कथा पूर्ण
● भजन कीर्तन के साथ नववर्ष का स्वागत होगा

खारघर @नवी मुंबई
प्रख्यात कथावाचक श्रद्धेय शांतिदूत देवकीनंदन ठाकुरजी महाराज ने कहा है कि सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए मंदिरों को बचाना बहुत ही आवश्यक है। उन्होंने कहा कि मंदिरों का धन सनातन कार्यों के लिए ही होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए गुरुकुलम की शिक्षा अनिवार्य है। मंदिरों की आय से देशभर में गुरुकुलम का निर्माण अवश्य होना चाहिए। इसके लिए उन्होंने सनातन बोर्ड बनाने की अपनी मांग को दोहराया और उन्होंने समस्त सनातनियों से अपील की कि वे सनातन की रक्षा के लिए एकजुट हों। महाराजश्री के सानिध्य में यहां नई मुंबई में खारघर स्थित कॉरपोरेट पार्क ग्राउंड पर चल रही शिवमहापुराण कथा मंगलवार को पूर्ण हुई। बुधवार की रात्रि महाराजश्री के सानिध्य में आयोजित भव्य भजन-कीर्तन संध्या में वर्ष 2025 को विदाई दी जाएगी। मध्यरात्रि में वर्ष 2026 का आध्यात्मिक तरीके से प्रभु के समक्ष दीप जलाकर स्वागत किया जाएगा।
शिवमहापुराण कथा की पूर्णता के अवसर पर महाराजश्री ने कहा कि भगवान शिव अपने भक्तों की समस्त समस्याओं का निवारण कर देते हैं। शिवभक्ति का महत्व बताते हुए उन्होंने कहा कि भगवान शिव बहुत भोले हैं और उन्हें जो कुछ भी अर्पित किया जाता है वह सब स्वीकार कर लेते हैं। वे विष को भी अपने कंठ में उतार लेते हैं। शिव केवल साधु -संतों, मनुष्यों का ही भला नहीं करते, वे असुरों, दानवों, कीटकों, पशु-पक्षियों, भूत-प्रेतों सभी का उद्धार करते हैं। सबको समाहित करने की शक्ति केवल शिव में है। शिव की भक्ति से ही समस्त उद्धार संभव है।

इस अवसर पर उन्होंने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हो रहे अत्याचार पर गहरी संवेदना जताते हुए दोहराया कि भारत बांग्लादेश के साथ भी क्रिकेट खेलना बंद करे। उन्होंने कहा कि आईपीएल में किसी भी बांग्लादेशी खिलाड़ी को शामिल नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने अत्याचार का शिकार हुए हिंदुओं की आत्मा की शांति के लिए हनुमान चालीसा का पाठ कराया। श्रद्धालुओं के कल्याण के लिए महाराजश्री ने शिवमहापुराण की आरती से पहले 12 ज्योतिर्लिंगों के मंत्र का मंत्रोच्चार भी उपस्थित श्रद्धालुओं से कराया।
● तुलसी का बड़ा महात्म्य
ठाकुरजी महाराज ने कहा कि तुलसी को साधारण मत समझना। तुलसी का बड़ा महात्म्य है। जिस घर में तुलसी है, वहां यमराज प्रवेश नहीं कर सकते। तुलसी को दीपदान अवश्य करें। बच्चों को भी सिखाएं की वे तुलसी के समक्ष श्रद्धा और भक्ति का दीप प्रज्वलित करें। कंठ में तुलसी माला धारण करें। भगवान का भोग तुलसी से लगाएं। विष्णु और श्री कृष्ण का जाप तुलसी से ही करें। इसके अनेक पुण्य हैं। तुलसी का एक कण भी जिसके शरीर पर होगा, भगवान भी उसका कुछ बिगाड़ नहीं पाते हैं।
