■ देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में महाराष्ट्र ने चुना स्थिरता और विकास

मुंबई, विशेष संवाददाता
देवेंद्र फडणवीस के नेतृत्व में महाराष्ट्र की शहरी राजनीति ने स्पष्ट मोड़ लिया है। बृहन्मुंबई महानगरपालिका जैसी प्रतिष्ठित संस्था से लेकर राज्य की अधिकांश प्रमुख महानगरपालिकाओं में भाजपा-नेतृत्व वाली महायुति की जीत और निर्णायक बढ़त ने यह संदेश दे दिया है कि शहरी मतदाता ने विकास, प्रशासनिक स्थिरता और स्पष्ट नीति को प्राथमिकता दी है। नतीजों में महायुति का दबदबा साफ झलकता है।
महाराष्ट्र में 15 जनवरी को 893 वार्डों की 2,869 सीटों के लिए मतदान हुआ था। 16 जनवरी को आए रुझानों के अनुसार खबर लिखे जाने तक भाजपा और सहयोगी दलों की महायुति करीब 23 महानगरपालिकाओं में आगे चल रही थी। इस चुनावी मैदान में मुंबई, पुणे, कल्याण-डोंबिवली, ठाणे, मीरा-भाईंदर सहित कुल 29 महानगरपालिकाएं शामिल रहीं।
इस बार सबसे अधिक निगाहें बृहन्मुंबई महानगरपालिका पर टिकी रहीं। देश की सबसे समृद्ध नगर निकायों में शुमार बीएमसी का बजट और प्रशासनिक प्रभाव इसे विशेष बनाता है। लंबे समय तक यहां शिवसेना का वर्चस्व रहा, पर इस चुनाव में राजनीतिक समीकरण बदले हुए नजर आए। मुख्य विपक्षी महा विकास आघाड़ी, कांग्रेस और राज ठाकरे की मनसे अधिकांश महानगरपालिकाओं में अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकीं। हालांकि लातूर जैसी कुछ जगहों पर कांग्रेस ने अपनी मजबूत मौजूदगी दर्ज कराई।
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने महायुति की बढ़त को लोकतांत्रिक जनादेश और विकास केंद्रित राजनीति की स्वीकृति बताया। आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक कुल मतदान प्रतिशत 54.77 रहा, जो शहरी मतदाताओं की सक्रिय भागीदारी को दर्शाता है।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ये नतीजे केवल नगर निगमों तक सीमित नहीं हैं। इन्हें आगामी विधानसभा और लोकसभा चुनावों के संकेतक के रूप में देखा जा रहा है। मुंबई के साथ-साथ पुणे, पिंपरी-चिंचवड़, ठाणे, नासिक और नागपुर जैसी प्रमुख महानगरपालिकाओं में भाजपा और उसके सहयोगी दलों का प्रभावी प्रदर्शन इस बात की पुष्टि करता है कि शहरी क्षेत्रों में महायुति के प्रति राजनीतिक भरोसा मजबूत हुआ है।
