
● मुंबई
मुलुंड-पूर्व स्थित वि जी वजे कॉलेज ऑफ आर्ट्स साइंस एंड कॉमर्स के विज्ञान संघ द्वारा राष्ट्रीय विज्ञान दिवस के अवसर पर मिनी ऑडिटोरियम में वैज्ञानिक कवि संगोष्ठी का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम प्रोग्रेसिव चैंबर ऑफ कॉमर्स और नेशनल सेंटर फॉर साइंस कम्युनिकेटर्स के सयुक्त तत्वाधान में आयोजित किया गया।
इस अवसर पर विशिष्ट अतिथियों के रूप में एनपीसीआईएल (एनपीसीआईएल) के उपमहाप्रबंधक अमृतेश श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार विठ्ठल सी नाडकर्णी, सुहास बी नाइक साटम, श्वेता दत्ता आदि की गरिमामयी उपस्थिति रही।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण लखनऊ के प्रख्यात कवि पंकज प्रसून और मुंबई के कवि महेश दुबे द्वारा प्रस्तुत वैज्ञानिक काव्यपाठ रहा। दोनों कवियों ने विज्ञान, अनुसंधान, परमाणु ऊर्जा, पर्यावरण संरक्षण और वैज्ञानिक सोच जैसे विषयों को काव्य के माध्यम से रोचक और प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया। उनकी रचनाओं ने विद्यार्थियों में वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का संदेश दिया।
अपने संबोधन में डायरेक्टर डॉ सिद्धिविनायक बरवे ने कहा कि वैज्ञानिक प्रगति देश के विकास की आधारशिला है और युवाओं को अनुसंधान व नवाचार की दिशा में आगे बढ़ना चाहिए। सुहास नाइक ने कहा विज्ञान तभी सार्थक है, जब वह समाज के अंतिम व्यक्ति तक अपनी उपयोगिता सिद्ध करे।
विठ्ठल सी. नाडकर्णी ने विज्ञान संचार की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि साहित्य और मीडिया के माध्यम से विज्ञान को जन-जन तक पहुँचाना समय की मांग है। आयोजन की सफलता के लिए धीरेन्द्र ठाकुर और श्वेता दत्ता का विशेष सहयोग रहा। कार्यक्रम में कॉलेज की प्राचार्य प्रो. (डॉ.) प्रीता निलेश, उपप्राचार्य डॉ. नीता मेहता, विज्ञान संघ की संयोजक डॉ. श्वेता जांबले एवं मुदिता सोनावणे सहित बड़ी संख्या में प्राध्यापक एवं विद्यार्थी उपस्थित रहे।
संगोष्ठी के अंत में अतिथियों का अभिनंदन एवं आभार प्रदर्शन किया गया। इस आयोजन ने विज्ञान और साहित्य के संगम का एक प्रेरणादायी उदाहरण सिद्ध हुआ, जिसने राष्ट्रीय विज्ञान दिवस को सार्थक और यादगार बना दिया।
