■ खाद्य संकट से जूझता बांग्लादेश, भारत से 9 लाख टन चावल की मांग

● नई दिल्ली
बांग्लादेश का स्वभाव और इतिहास रहा है कि उसने भारत से हमेशा घात ही किया है। अब हालात यह हैं कि बांग्लादेश खाद्य संकट से जूझ रहा है और भारत से भात (चावल) मांग रहा है।बाढ़ और सामाजिक अस्थिरता के चलते बांग्लादेश में खाद्य हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं। देश के सामने अपने नागरिकों के लिए पर्याप्त अनाज जुटाने की चुनौती खड़ी हो गई है। इस पृष्ठभूमि में बांग्लादेश ने एक बार फिर भारत से मदद की गुहार लगाई है और कुल 9 लाख टन चावल की आवश्यकता जताई है। पहले चरण में भारत से 2 लाख टन उबले चावल की आपूर्ति का अनुरोध किया गया है, जिसे भारत ने मंजूरी दे दी है। यह चावल शीघ्र ही बांग्लादेश भेजा जाएगा।
इस बार बांग्लादेश ने भारत की 232 निजी कंपनियों के माध्यम से चावल आपूर्ति की व्यवस्था करने का प्रस्ताव रखा है। इसके लिए 10 मार्च 2026 तक आयात की अनुमति दी गई है। इससे पहले अक्तूबर में भारत ने 50 हजार टन चावल बांग्लादेश को भेजकर राहत पहुंचाई थी।
भारत-बांग्लादेश के व्यापारिक और आर्थिक संबंध लंबे समय से मजबूत रहे हैं। भारत बांग्लादेश को कपास, धागा, पेट्रोलियम उत्पाद, मशीनरी, ऑटो पार्ट्स, मसाले, बिजली और उपभोक्ता वस्तुओं की नियमित आपूर्ति करता है। इसके साथ ही गेंहू, चीनी, प्याज, आलू, लहसन, फल-सब्जियां, स्टील, प्लास्टिक और दवाइयों के क्षेत्र में भी बांग्लादेश की निर्भरता भारत पर बनी रहती है।
वाणिज्यिक आंकड़े भी इस रिश्ते की गहराई को दर्शाते हैं। वर्ष 2022-23 में दोनों देशों के बीच कुल व्यापार करीब 16 अरब डॉलर का रहा। इसमें भारत का निर्यात लगभग 14 अरब डॉलर और आयात 2 अरब डॉलर का रहा। इसके अलावा, भारत ने बांग्लादेश की बुनियादी ढांचा परियोजनाओं के लिए 8 अरब डॉलर की सहायता प्रदान की, जिससे सड़क, रेलवे और बंदरगाह जैसे अहम प्रोजेक्ट साकार हुए।
इस ताजा खाद्य सहायता से बांग्लादेश को तत्काल राहत मिलने की उम्मीद है, साथ ही भारत-बांग्लादेश के मानवीय और आर्थिक संबंधों को भी नई मजबूती मिलेगी।
