
● मुंबई
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वोकल फॉर लोकल और आत्मनिर्भर भारत विजन को एक और अहम उपलब्धि मिली है। आंध्र प्रदेश की पारंपरिक और दुर्लभ पोंडुरु खादी को भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्रदान किया गया है। इस मान्यता को भारतीय हस्तकरघा परंपरा के लिए वैश्विक पहचान की दिशा में निर्णायक कदम माना जा रहा है।
खादी और ग्रामोद्योग आयोग (केवीआईसी) के अध्यक्ष मनोज कुमार ने कहा कि पोंडुरु खादी को जीआई टैग मिलना प्रधानमंत्री मोदी के मार्गदर्शन में खादी को पुनर्जीवित करने के निरंतर प्रयासों का परिणाम है। इस पहचान से पोंडुरु खादी की मौलिकता सुरक्षित रहेगी और पीढ़ियों से इस कला को जीवित रखने वाले कारीगरों को सम्मान के साथ आर्थिक मजबूती भी मिलेगी।
पोंडुरु खादी आंध्र प्रदेश के श्रीकाकुलम जिले के पोंडुरु गांव में तैयार की जाती है। स्थानीय लोग इसे ‘पटनुलु’ के नाम से जानते हैं। पहाड़ी, पुनासा और लाल कपास से बने इस वस्त्र की कताई और बुनाई पूरी तरह हाथों से होती है। कपास की सफाई में वालुगा मछली के जबड़े की हड्डी का उपयोग इसकी विशिष्ट पहचान है। 100 से 120 यार्न काउंट वाली यह खादी अपनी बारीक बनावट और टिकाऊ गुणवत्ता के लिए जानी जाती है।
केवीआईसी के अनुसार जीआई टैग मिलने से पोंडुरु खादी को नकली उत्पादों से कानूनी संरक्षण मिलेगा, कारीगरों की आय में वृद्धि होगी और रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे। महात्मा गांधी के स्वदेशी विचारों से जुड़ी खादी आज मोदी युग में परंपरा और आधुनिकता के संगम का सशक्त प्रतीक बनकर सामने आ रही है।
