■ श्रीकुल पीठ के श्री श्री 1008 डॉ. सचिन्द्र नाथ जी महाराज की उपस्थिति में समरसता का संदेश

● विनीत त्रिपाठी@गोरखपुर
नेपाल क्लब, सिविल लाइन्स रोड पर आयोजित 51 जोड़ों के पावन सामूहिक विवाह कार्यक्रम में आध्यात्मिक चेतना, सामाजिक संवेदना और संस्कारों का सुंदर संगम देखने को मिला। इस अवसर पर ब्रह्मराष्ट्र एकम एवं श्रीकुल पीठ के परम पूज्य श्री श्री 1008 डॉ. सचिन्द्र नाथ जी महाराज ने कार्यक्रम में उपस्थित होकर सभी नवविवाहित जोड़ों को दिव्य आशीर्वाद प्रदान किया और उनके सुखद दाम्पत्य जीवन की मंगलकामनाएँ कीं।
अपने आशीर्वचन में पूज्य महाराज ने भारतीय शास्त्रीय परंपरा का स्मरण कराते हुए कहा कि नारी समाज की आधारशिला है। उन्होंने मनुस्मृति के प्रसिद्ध श्लोक ‘यत्र नार्यस्तु पूज्यन्ते रमन्ते तत्र देवताः’ का उल्लेख करते हुए कहा कि जहाँ नारी का सम्मान होता है, वहीं देवत्व का वास होता है। सामूहिक विवाह जैसे आयोजन नारी गरिमा, सामाजिक समरसता और मानवीय करुणा के सशक्त उदाहरण हैं।

पूज्य महाराज ने इस पुण्य आयोजन के लिए प्रमुख समाजसेविका श्रीमती सुधा मोदी के प्रयासों की विशेष सराहना की। उन्होंने कहा कि श्रीमती सुधा मोदी का सेवा-संकल्प समाज के वंचित और जरूरतमंद परिवारों को भी विवाह जैसे पवित्र संस्कार में सम्मानपूर्वक सहभागी बनने का अवसर देता है। यह कार्य समाज को जोड़ने वाला है और इसमें करुणा व संवेदना की स्पष्ट झलक मिलती है। महाराज ने उन्हें विशेष मंगल आशीर्वाद प्रदान करते हुए उनके कार्य को ईश्वरीय प्रेरणा से अनुप्राणित बताया।
पूज्य महाराज ने आयोजकों, संयोजकों और सभी परिजनों के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि सोलह संस्कारों में विवाह संस्कार समाज की नींव को सुदृढ़ करता है। ऐसे आयोजनों से सामाजिक समानता को बल मिलता है और संसाधनों के अभाव में पीछे रह जाने वाले परिवारों को भी गरिमा प्राप्त होती है।
अंत में उन्होंने कामना की कि यह प्रेरक परंपरा निरंतर आगे बढ़े और समाज में सेवा, संस्कार तथा समरसता का दीप सदैव प्रज्वलित रहे।
