■ सियासत के केंद्र में सनातन परंपरा

● प्रयागराज
प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान शंकराचार्य से जुड़ा घटनाक्रम अब केवल धार्मिक दायरे तक सीमित नहीं रह गया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद और समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव के बयानों के बाद यह मामला आस्था, प्रशासन और राजनीति के त्रिकोण में खड़ा दिखाई दे रहा है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बिना किसी व्यक्ति या संस्था का नाम लिए कहा कि आज सनातन धर्म की आड़ में उसे कमजोर करने वाले कई ‘कालनेमि’ तत्व सक्रिय हैं, जिनसे समाज को सतर्क रहने की आवश्यकता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि योगी, संत या संन्यासी के लिए धर्म और राष्ट्र सर्वोपरि होते हैं तथा उसकी कोई निजी संपत्ति नहीं होती। मुख्यमंत्री ने कहा कि धर्म वेश से नहीं, आचरण से सिद्ध होता है और जो आचरण धर्मविरोधी है, वह सनातन परंपरा का प्रतिनिधित्व नहीं कर सकता।
दूसरी ओर, शंकराचार्य पक्ष ने प्रशासनिक कार्रवाई पर आपत्ति जताते हुए धार्मिक परंपराओं और संतों की गरिमा के सम्मान की मांग की है। उनके अनुयायियों का कहना है कि मौनी अमावस्या जैसे पावन अवसर पर रथ यात्रा और स्थान-प्रवेश पर रोक धार्मिक स्वतंत्रता और परंपरागत अधिकारों पर आघात है। शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के मीडिया प्रभारी शैलेंद्र योगिराज के अनुसार, प्रशासन ने बुधवार शाम शिविर के पीछे 18 जनवरी की तिथि वाला नोटिस चस्पा किया जबकि गुरुवार सुबह शंकराचार्य ने तीन पन्नों में उसका जवाब मेला कार्यालय भिजवाया। अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा कि प्रशासन ‘नोटिस-नोटिस’ का खेल खेल रहा है और जब तक मौनी अमावस्या का स्नान नहीं हो जाता, तब तक बसंत स्नान का प्रश्न ही नहीं उठता।
इस विवाद पर समाजवादी पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सरकार को संयम बरतने की सलाह दी है। उन्होंने कहा कि धर्म और आस्था से जुड़े मामलों में टकराव नहीं, संवाद का रास्ता अपनाया जाना चाहिए। अखिलेश यादव ने आरोप लगाया कि प्रदेश सरकार के रवैये से सनातन परंपराओं और संत समाज को ठेस पहुंची है तथा यह पूरा घटनाक्रम अनावश्यक टकराव को जन्म दे रहा है।
कुल मिलाकर, माघ मेले से जुड़ा यह विवाद अब धर्म, आचरण, प्रशासनिक निर्णय और राजनीति के संगम पर पहुंच गया है। एक ओर सरकार आचरण की शुद्धता और राष्ट्रहित की बात कर रही है, वहीं शंकराचार्य पक्ष परंपरागत धार्मिक अधिकारों की रक्षा पर अडिग है, जबकि विपक्ष संवाद की आवश्यकता पर जोर दे रहा है।
