■ ड्रोन से लेकर पैराग्लाइडर तक, हर हवाई खतरे पर कड़ी नजर

● नई दिल्ली
आगामी गणतंत्र दिवस को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों ने सीमावर्ती इलाकों में एक और उच्च स्तरीय अलर्ट जारी किया है। चेतावनी में संवेदनशील क्षेत्रों की चौकसी बढ़ाने और किसी भी संभावित खतरे से निपटने के लिए सतर्कता को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए हैं। सीमा पर तैनात सुरक्षा बलों को ड्रोन गतिविधियों की सघन निगरानी के आदेश दिए गए हैं, क्योंकि खुफिया एजेंसियों को आशंका है कि ड्रोन के जरिए हथियार और विस्फोटक भारतीय क्षेत्र में भेजे जा सकते हैं।
यह अलर्ट विशेष रूप से पंजाब, जम्मू-कश्मीर और राजस्थान की सीमाओं पर केंद्रित है, जहां पहले भी संदिग्ध हवाई गतिविधियों के इनपुट मिलते रहे हैं। खुफिया सूत्रों के अनुसार आतंकी संगठन अब पारंपरिक तरीकों के साथ-साथ पैराग्लाइडर और हैंग ग्लाइडर का इस्तेमाल कर घुसपैठ की कोशिश कर सकते हैं। जानकारी है कि लश्कर-ए-तैबा और कुछ सिख चरमपंथी संगठनों ने हाल के दिनों में पैराग्लाइडिंग से जुड़े उपकरण हासिल किए हैं।
इन आशंकाओं को देखते हुए सुरक्षा बलों को पूरी तरह सतर्क कर दिया गया है। हवाई निगरानी बढ़ाई गई है, वहीं जमीनी स्तर पर भी सुरक्षा घेरा और मजबूत किया गया है। एजेंसियों को निर्देश दिए गए हैं कि गणतंत्र दिवस परेड की तैयारियों के दौरान किसी भी संदिग्ध गतिविधि को तुरंत चिन्हित कर कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।
इसी क्रम में राजधानी दिल्ली में भी सुरक्षा व्यवस्था को तकनीकी रूप से और सशक्त किया जा रहा है। एक वरिष्ठ अधिकारी के अनुसार, दिल्ली पुलिस पहली बार एआई-सक्षम स्मार्ट चश्मों की तैनाती करेगी, जो फेशियल रिकग्निशन सिस्टम (एफआरएस) और थर्मल इमेजिंग तकनीक से लैस होंगे। भारतीय कंपनी द्वारा विकसित ये पहनने योग्य उपकरण पुलिस के डेटाबेस से रियल टाइम में जुड़े रहेंगे।
अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (नई दिल्ली) देवेश कुमार महला ने बताया कि ये स्मार्ट चश्मे पुलिस अधिकारियों के मोबाइल फोन से कनेक्ट होंगे, जिनमें अपराधियों, घोषित अपराधियों और संदिग्धों का पूरा डेटा उपलब्ध रहेगा। इससे भीड़भाड़ वाले इलाकों में भी किसी व्यक्ति की तुरंत पहचान संभव हो सकेगी।
साफ है, इस बार गणतंत्र दिवस पर सुरक्षा व्यवस्था न सिर्फ सख्त बल्कि तकनीक से लैस और बहुस्तरीय होगी।
