- 88 घंटे में निर्णायक जवाब की ताकत दिखाएगी सेना की झांकी

● नई दिल्ली
ऑपरेशन सिंदूर के बाद मनाए जा रहे गणतंत्र दिवस समारोह में कर्तव्य पथ पर इस बार देश की सैन्य शक्ति और रणनीतिक एकजुटता की झलक देखने को मिलेगी। थलसेना, वायुसेना और नौसेना की संयुक्त झांकी में यह दर्शाया जाएगा कि किस तरह महज 88 घंटों के भीतर पाकिस्तान प्रायोजित आतंकी ढांचे और सैन्य ठिकानों पर निर्णायक प्रहार किया गया।
इंटीग्रेटेड डिफेंस स्टाफ (आईडीएस) मुख्यालय की इस झांकी में 6–7 मई की रात को राफेल लड़ाकू विमानों से किए गए हवाई हमलों को प्रमुखता से दिखाया गया है, जिनके जरिए पाकिस्तान से संचालित आतंकी संगठनों जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा के मुख्यालयों को निशाना बनाया गया। आईडीएस से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, ऑपरेशन सिंदूर में तीनों सेनाओं ने समन्वय के साथ अपनी-अपनी भूमिका निभाई, और उसी सामूहिक शक्ति को झांकी के माध्यम से प्रस्तुत किया जा रहा है।
झांकी में राफेल के साथ-साथ सुखोई से दागी जाने वाली ब्रह्मोस मिसाइल भी दिखाई देगी। भारत–पाक सीमा की कंटीली तार के उस पार पाकिस्तानी वायुसेना के एक एयरबेस पर ब्रह्मोस हमले का दृश्य दर्शाया गया है, जहां खड़े एफ-16 लड़ाकू विमानों को नष्ट होते दिखाया गया है। यह दृश्य भोलारी एयरबेस पर भारतीय वायुसेना की कार्रवाई की याद दिलाता है।
झांकी का एक प्रमुख आकर्षण एस-400 एयर डिफेंस सिस्टम है, जिसने 300 किलोमीटर दूर पाकिस्तानी टोही विमान को मार गिराया था। इसके अलावा आकाश मिसाइल, काउंटर-ड्रोन गन्स और तीन दिनों में सियाचिन से लेकर जम्मू-कश्मीर, पंजाब, राजस्थान और रण ऑफ कच्छ तक मार गिराए गए करीब 900 ड्रोन की कहानी भी प्रदर्शित होगी।
ऑपरेशन के दौरान इजरायल से प्राप्त हारपी और हारोप लोएटरिंग म्युनिशन से पाकिस्तानी रडार स्टेशनों पर किए गए हमले भी झांकी का हिस्सा हैं। इन सटीक प्रहारों से घबराकर पाकिस्तान ने 10 मई 2025 को युद्धविराम की अपील की थी। भारत ने तब ऑपरेशन सिंदूर रोका, पर यह स्पष्ट संदेश दिया कि भविष्य में किसी भी आतंकी दुस्साहस का जवाब पहले से अधिक कठोर होगा।
