
● मुंबई
वैश्विक स्तर पर रिसर्च एंड डेवलपमेंट (R&D) पर होने वाला खर्च किसी भी देश की वैज्ञानिक क्षमता, तकनीकी आत्मनिर्भरता और भविष्य की आर्थिक दिशा को दर्शाता है। वर्ष 2024–25 के ताज़ा अंतरराष्ट्रीय आकलनों के अनुसार, इस क्षेत्र में चीन और संयुक्त राज्य अमेरिका दुनिया के दो सबसे बड़े निवेशक बने हुए हैं, जबकि भारत टॉप-10 देशों की सूची में सातवें स्थान पर है।
कुल R&D खर्च के मामले में चीन पहले स्थान पर है। अनुमान है कि चीन ने इस अवधि में लगभग 785 अरब अमेरिकी डॉलर (PPP) के बराबर राशि अनुसंधान और विकास पर खर्च की। इसके बाद बहुत कम अंतर से संयुक्त राज्य अमेरिका दूसरे स्थान पर है, जिसका R&D निवेश लगभग 781 अरब अमेरिकी डॉलर (PPP) रहा। इन दोनों देशों का संयुक्त निवेश वैश्विक R&D खर्च का बड़ा हिस्सा बनाता है, जिससे तकनीक, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रक्षा, स्वास्थ्य और औद्योगिक नवाचार में उनकी बढ़त साफ दिखाई देती है।
तीसरे स्थान पर जापान है, जो ऑटोमोबाइल, रोबोटिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे क्षेत्रों में निरंतर अनुसंधान के लिए जाना जाता है। चौथे नंबर पर जर्मनी और पांचवें स्थान पर दक्षिण कोरिया हैं, जहां उद्योग आधारित शोध और उच्च तकनीक नवाचार को विशेष प्राथमिकता दी जाती है। छठे स्थान पर यूनाइटेड किंगडम है, जिसने विज्ञान और उच्च शिक्षा से जुड़े शोध में अपनी मजबूत मौजूदगी बनाए रखी है।
भारत इस वैश्विक सूची में सातवें स्थान पर है। भारत का अनुमानित R&D खर्च 75 से 80 अरब अमेरिकी डॉलर (PPP) के बीच माना जा रहा है। यह उपलब्धि इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत एक विकासशील अर्थव्यवस्था होते हुए भी शीर्ष 10 देशों में शामिल है। इसके बाद फ्रांस, कनाडा और इटली क्रमशः आठवें, नौवें और दसवें स्थान पर हैं।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत में R&D निवेश लगातार बढ़ रहा है, लेकिन GDP के अनुपात में यह अभी भी अपेक्षाकृत कम है। आने वाले वर्षों में यदि निजी क्षेत्र, स्टार्ट-अप्स और सरकारी योजनाओं के जरिए शोध पर निवेश बढ़ाया जाता है, तो भारत वैश्विक नवाचार मानचित्र पर और मजबूत स्थिति बना सकता है।
