
● मुंबई
केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा राष्ट्रगान से पहले ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह श्लोकों के गायन को अनिवार्य करने संबंधी निर्देश पर वरिष्ठ अभिनेता अन्नू कपूर ने खुलकर समर्थन व्यक्त किया है। उन्होंने इसे “बेहतरीन और शानदार निर्णय” बताते हुए कहा कि यह कदम राष्ट्रीय चेतना को सुदृढ़ करेगा।
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में अन्नू कपूर ने कहा कि वे पिछले 32 वर्षों से ‘वंदे मातरम्’ के प्रचार-प्रसार में सक्रिय हैं। उनके अनुसार, इस विषय पर राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा होना स्वयं में सकारात्मक संकेत है। उन्होंने कहा, “यह निर्णय भले हाल में लिया गया हो, किंतु मैं तीन दशकों से ‘वंदे मातरम्’ का जप कर रहा हूं। यह मेरे लिए गर्व का विषय है।”
उन्होंने भावुक अंदाज में कहा कि यदि अमेरिका के न्यू जर्सी, न्यूयॉर्क, लॉस एंजिल्स, कैलिफोर्निया या ह्यूस्टन जैसे शहरों में कोई भारतीय ‘वंदे मातरम्’ उच्चारित करता है, तो उन्हें प्रसन्नता होती है। उनके शब्दों में, यह गीत केवल एक उद्घोष नहीं, बल्कि सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है।
अन्नू कपूर ने ‘वंदे मातरम्’ को बंकिमचंद्र चटोपाध्याय की अमर रचना बताते हुए कहा कि इस पर किसी को आपत्ति नहीं होनी चाहिए। उन्होंने इसे राष्ट्र की आत्मा से जुड़ा भावनात्मक सूत्र बताया।
संस्कृत भाषा के संदर्भ में उन्होंने कहा कि यह विश्व की प्राचीनतम भाषाओं में से एक है, जिसमें अद्वितीय साहित्य और प्रार्थनाएं रची गई हैं। यदि कोई इसे हिंदू प्रार्थना मानता भी है, तो इसमें आपत्ति का कारण क्या है? उनके अनुसार हिंदू प्रार्थना केवल व्यक्तिगत हित तक सीमित नहीं रहती, बल्कि समस्त विश्व के कल्याण की भावना से प्रेरित होती है।
उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि वैश्विक हिंसा और अशांति के दौर में यदि कहीं से शांति की सुगंध उठ सकती है, तो वह भारत की सांस्कृतिक परंपरा से ही प्रस्फुटित होगी।
