
● मीरा रोड।
मीरा-भाईंदर में स्वरसंगम फाउंडेशन द्वारा आयोजित एक विशेष साहित्यिक संध्या में इतालवी हिंदी विद्वान प्रो. अलेक्सांद्रा कंसोलारो और लोक शाहिर संभाजी भगत मुख्य आकर्षण रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकार प्रो. असगर वजाहत ने की।
कार्यक्रम का संचालन रमन मिश्र ने गंभीरता और संवेदनशीलता के साथ किया। प्रारंभ में डॉ. हरिप्रसाद राय ने अतिथियों का स्वागत किया तथा अंत में हृदयेश मयंक ने आभार व्यक्त किया। मीरा-भाईंदर के सक्रिय शिक्षकों की संस्था द्वारा प्रो. कंसोलारो और संभाजी भगत का नागरिक अभिनंदन भी किया गया।
प्रो. कंसोलारो ने हिंदी भाषा, अनुवाद और भारतीय समाज की अंतरराष्ट्रीय छवि पर विचारोत्तेजक वक्तव्य दिया। उन्होंने कहा कि किसी भाषा का अनुवाद करने के लिए उसकी संस्कृति में गहराई से उतरना आवश्यक है। इटली में हिंदी के प्रति सीमित जिज्ञासा और भारत की रूढ़ छवि पर भी उन्होंने स्पष्ट टिप्पणी की। उन्होंने बताया कि वे पिछले चार दशकों से हिंदी और भारतीय समाज से जुड़ी हैं तथा वर्तमान में अंबेडकर साहित्य, दलित और आदिवासी लेखन पर शोध कर रही हैं। अपने अनुभव साझा करते हुए उन्होंने शैक्षणिक संस्थानों की कार्यशैली और लालफीताशाही पर भी सवाल उठाए।

लोक गायक संभाजी भगत ने सीमित समय में भी अपने जनगीतों से श्रोताओं को प्रभावित किया। उल्लेखनीय है कि वे इस वर्ष विद्रोही साहित्य सम्मेलन के अध्यक्ष चुने गए हैं।
सभागार में धीरेंद्र अस्थाना, हरि मृदुल, राकेश शर्मा, दिनेश शाकुन, अजय रोहिल्ला, ललिता अस्थाना, संजय भिसे, रीतादास राम, आभा दवे, उत्तम भगत, डॉ अनिता ठक्कर, मुख्तार खान, सुबोध मोरे सहित अनेक लेखक, कलाकार और साहित्यप्रेमी उपस्थित रहे। यह संध्या विचार, संवाद और सांस्कृतिक चेतना का सशक्त मंच बनकर उभरी।
