
● नई दिल्ली
भारत में अपने परिसर स्थापित कर रहे विदेशी विश्वविद्यालयों की फीस संरचना को लेकर शिक्षा मंत्रालय ने बड़ा दावा किया है। मंत्रालय के अनुसार, भारतीय कैंपस में पढ़ने वाले छात्रों को संबंधित विश्वविद्यालय के विदेशी परिसर की तुलना में आधी या उससे भी कम फीस देनी होगी। कुछ पाठ्यक्रमों में यह फीस विदेशी कैंपस की मात्र 25 प्रतिशत तक सीमित रहेगी। यानी विदेश में यदि सौ रुपये शुल्क है, तो भारत में वही कोर्स 25 रुपये में उपलब्ध हो सकता है।
अब तक 19 विदेशी विश्वविद्यालयों को देश में परिसर खोलने की अनुमति मिल चुकी है। इनमें से पांच को गुजरात के गिफ्ट सिटी में स्थापित होने की स्वीकृति दी गई है। मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि अनुमति इसी शर्त पर दी जा रही है कि भारतीय छात्रों पर शुल्क का बोझ कम रखा जाए।
फिलहाल इन 19 में से गिफ्ट सिटी में दो और गुरुग्राम में एक विश्वविद्यालय ने शैक्षणिक गतिविधियां प्रारंभ की हैं। प्रत्येक संस्थान की सीट क्षमता लगभग 150 से 200 के बीच है। मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि कम फीस के साथ-साथ छात्रों को विदेश में रहने, भोजन और परिवहन जैसे भारी खर्चों से भी राहत मिलेगी।
हालांकि सभी स्वीकृत विश्वविद्यालयों के पूर्ण रूप से शुरू होने में डेढ़ से दो वर्ष का समय लग सकता है। यदि सभी संस्थान प्रारंभिक क्षमता के साथ संचालित होते हैं, तो कुल मिलाकर लगभग साढ़े तीन से चार हजार छात्रों को ही प्रवेश मिल पाएगा।
इसी क्रम में इस माह विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने पांच नए विश्वविद्यालयों को अनुमति प्रदान की है। इनमें Queen’s University Belfast, Coventry University, University of Surrey, Illinois Institute of Technology और Istituto Europeo di Design शामिल हैं।
