
● वसई
“आओ गायें रामकथा घर घर में” आध्यात्मिक आंदोलन की देश विदेश तक अलख जगाने वाले, मानस के सिद्ध साधक, व्यवहार घाट के ओजस्वी प्रवक्ता, क्रांतिकारी संत प्रेममूर्ति पूज्यश्री प्रेमभूषण महाराज ने व्यासपीठ से संबोधित करते हुए कहा कि सत्कर्म करना अपने हाथ में नहीं होता। इसपर प्रवचन आसान है किंतु पालन अत्यंत कठिन। संसार के किसी कार्य में विघ्न नहीं आता, लेकिन सत्कर्म करते समय अवरोध अवश्य आता है। सत्कर्म में पूरी तन्मयता से जुट जाना ही भगवत कृपा है।
राजनेताओं के व्यवहार की चर्चा करते हुए पूज्यश्री ने कहा कि लोकतंत्र के वर्तमान राजा लोग कथाओं में कम आते हैं किंतु जैसे ही भूतपूर्व हो जाते हैं उनका आना-जाना बढ़ जाता है। जो व्यक्ति कथा में निरंतर लगा हुआ है, कथा उसको नहीं सुनाना है। यह उनके लिए है जो कथा से दूर हैं। जीव को जीवन में सर्वस्व की प्राप्ति होने पर भगवान भूल ही जाते हैं।
पूज्यश्री प्रेमभूषण महाराज कथा प्रवाह में बताया कि यात्रा में मछली का दर्शन, पुस्तक लिये विद्यार्थी, बच्चे को गोद लिए माता, बछिया को दूध पिलाती गाय माता एवं आचार्य का दर्शन शुभ होता है।
पूज्यश्री ने सनातन संस्कृति और भारतीय परंपरा का महिमा गान करते हुए कहा कि दुनिया ने हाथ न मिलाना कोविड में समझा लेकिन हमारे यहाँ तो हाथ जोड़कर दूर से राम राम कहकर अभिवादन करने की परंपरा आदि काल से ऋषियों-मुनियों ने बना रखी है।
भगवत कार्य में केवल प्रवेश कर देने से अनेकों सहयोगी स्वयं मिल जाते हैं। भक्ति पथ पर बढ़ने की प्रवेशिका है सत्संग। इस प्रकार पूज्यश्री प्रेमभूषण महाराज ने श्रीमती मीरा बिजेन्द्र सिंह के संकल्प से समाज सेवक बिजेन्द्र रामचंद्र सिंह द्वारा आयोजित नौ दिवसीय मानस महाकुंभ के पूर्णाहुति सत्र में सुंदरकांड से रामराज्यभिषेक तक की कथा का सजीव चित्रण करते हुए श्रोताओं को मानस के अनेक जीवनोपयोगी सूत्रों से लाभान्वित किया।
गणेश अग्रवाल, अविनाश मिश्रा, दीपक पाण्डे, सुधाकर सिंह’विशेन’, सनी सिंह, श्रीमती अशोका तिवारी, सुधा दूबे, निशा शर्मा, प्रिया सिंह सहित कथा की व्यवस्था को संभालने वाले प्रिंस बिजेन्द्र सिंह आदि गणमान्य जनों ने उपस्थित रहकर मानस महाकुंभ में अवगाहन करके पुण्य लाभ प्राप्त किया।
