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■ सूर्यकांत उपाध्याय एक बार एक विद्यार्थी अपने गुरु के पास पहुँचा। उसकी आँखों में निराशा थी।...
■ सूर्यकांत उपाध्याय “पापा-पापा, मुझे चोट लग गई… खून आ रहा है!”5 साल के बच्चे के मुंह...
■ सूर्यकांत उपाध्याय मलूकदास जी कर्मयोगी संत थे। स्वाध्याय, सत्संग व भ्रमण से उन्होंने जो व्यावहारिक ज्ञान...
● मुंबई‘वाग्धारा’ द्वारा आयोजित राष्ट्रीय संगोष्ठी ‘युद्ध नहीं, बुद्ध’ में वैचारिक चर्चा के साथ मानवता के पक्ष...