- 1.15 लाख करोड़ की योजनाओं से राज्य के कई जिलों को मिलेगा पानी
- वैनगंगा–नलगंगा और नार–पार–गिरणा परियोजनाओं से सिंचाई और जल प्रबंधन को

● मुंबई
महाराष्ट्र में लंबे समय से चर्चा में रही नदी जोड़ परियोजनाओं को अब नई गति मिलने जा रही है। धुले में तत्कालीन जिलाधिकारी संभाजी मुंडे के कार्यकाल में गिरणा–कनोली बोरी नदी जोड़ परियोजना के सफल क्रियान्वयन के बाद से राज्य में इस तरह की योजनाओं की मांग लगातार उठती रही। अब मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने इन महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को आगे बढ़ाते हुए राज्य के जल प्रबंधन को दीर्घकालीन दृष्टि से मजबूत करने का निर्णय लिया है।
राज्य सरकार ने करीब 1 लाख 15 हजार 530 करोड़ रुपये की लागत वाली विभिन्न नदी जोड़ परियोजनाओं को मंजूरी प्रदान की है। इन योजनाओं का उद्देश्य आने वाले दो दशकों की जल आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में पानी की उपलब्धता सुनिश्चित करना है। सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं के पूरा होने पर राज्य के कई हिस्सों में जल संकट काफी हद तक कम हो सकेगा।
इसी कड़ी में वैनगंगा–नलगंगा नदी जोड़ परियोजना को लगभग 94 हजार 968 करोड़ रुपये की लागत से मंजूरी दी गई है। इस योजना के तहत भंडारा जिले से बहने वाली वैनगंगा नदी के अतिरिक्त जल को बुलढाणा जिले की पूर्णा–नलगंगा नदी तक पहुंचाया जाएगा। इसके लिए विदर्भ के कई जिलों से गुजरने वाली 388.28 किलोमीटर लंबी नहर का निर्माण किया जाएगा, जिसमें लगभग 20.49 किलोमीटर लंबाई के 13 सुरंग मार्ग भी शामिल होंगे। इस परियोजना से नागपुर, वर्धा, अमरावती, यवतमाळ, अकोला, बुलढाणा, वाशिम और भंडारा जिलों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
इसके अलावा वैतरणा–उल्हास नदी घाटी से करीब 54 टीएमसी अतिरिक्त जल को गोदावरी बेसिन की ओर मोड़ने की योजना भी तैयार की गई है। इस पहल से विशेष रूप से मराठवाड़ा के जल संकट से जूझ रहे क्षेत्रों को बड़ी राहत मिलने की संभावना जताई जा रही है।
उत्तर महाराष्ट्र की महत्वपूर्ण नार–पार–गिरणा नदी जोड़ परियोजना को भी लगभग 7 हजार 465 करोड़ रुपये की मंजूरी दी गई है। इस योजना के माध्यम से पश्चिम की ओर बहने वाली नदियों के अतिरिक्त पानी को गिरणा घाटी में लाकर करीब 49,516 हेक्टेयर भूमि को सिंचाई के दायरे में लाने का लक्ष्य रखा गया है। इससे नाशिक और जळगांव के सूखा प्रभावित क्षेत्रों में खेती और जल उपलब्धता दोनों को मजबूती मिलने की उम्मीद है।
