◾ अकेला राज्य उगाता है हर पांचवां करेला

▪️ मुंबई
गर्मियों में करेला भले ही अपने कड़वे स्वाद के लिए जाना जाता हो, लेकिन स्वास्थ्य लाभों के कारण इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। खासकर कच्चे आम के साथ बनी करेले की सब्जी कई घरों की पसंदीदा डिश है। दिलचस्प बात यह है कि जिस करेले को हम रोजमर्रा की सब्जी मानते हैं, उसके उत्पादन में राज्य पूरे देश का नेतृत्व कर रहा है। यही वजह है कि इसे देश की ‘करेला कैपिटल’ भी कहा जाने लगा है।
भारत में हर वर्ष लगभग 80 से 90 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में करेले की खेती की जाती है और इसका कुल उत्पादन 15 से 18 लाख टन के आसपास माना जाता है। इनमें सबसे बड़ा योगदान मध्य प्रदेश का है। वर्ष 2023-24 के आंकड़ों के अनुसार राज्य में करीब 3.33 लाख टन करेले का उत्पादन हुआ, जो देश के कुल उत्पादन का लगभग 20 प्रतिशत से अधिक हिस्सा है।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार मध्य प्रदेश की उपजाऊ मिट्टी, अनुकूल जलवायु और बेहतर सिंचाई सुविधाएं इसे करेला उत्पादन के लिए आदर्श बनाती हैं। धार, इंदौर, उज्जैन और आसपास के जिले इसके प्रमुख उत्पादन केंद्र हैं। यहां पूसा विशेष, पूसा हाइब्रिड-1, अरका हरित और एमडीयू-1 जैसी उन्नत किस्मों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है। आधुनिक हाइब्रिड बीजों की मदद से किसान प्रति हेक्टेयर 25 से 30 टन तक उत्पादन प्राप्त कर रहे हैं।
करेला केवल किसानों की आय बढ़ाने वाली फसल ही नहीं, बल्कि पोषण का भी महत्वपूर्ण स्रोत है। इसमें विटामिन C, विटामिन A, फाइबर, आयरन और एंटीऑक्सीडेंट्स भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं। नियमित सेवन से रक्त शर्करा नियंत्रण, कोलेस्ट्रॉल प्रबंधन और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
मध्य प्रदेश के बाद छत्तीसगढ़, ओडिशा, तमिलनाडु, गुजरात, उत्तर प्रदेश, आंध्र प्रदेश और महाराष्ट्र भी प्रमुख उत्पादक राज्यों में शामिल हैं। चूंकि करेला कम अवधि की नकदी फसल है, इसलिए किसान इसे अन्य फसलों के बीच उगाकर अतिरिक्त आय भी अर्जित करते हैं। यही कारण है कि देश में इसकी खेती लगातार लोकप्रिय होती जा रही है।
