◾भारतीय इंजीनियर वैभव की तकनीक दुनिया भर में चर्चा में

▪️ नई दिल्ली
मध्य-पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक अत्याधुनिक ड्रोन बोट ने समुद्र में फंसे दो अमेरिकी पायलटों की जान बचाकर पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। हॉर्मूज जलडमरूमध्य में हुए इस साहसिक बचाव अभियान के बाद यह मानव रहित नाव और इसके विकास से जुड़े भारतीय मूल के इंजीनियर वैभव चर्चा के केंद्र में आ गए हैं।
बताया जा रहा है कि अमेरिकी सेना के एक अपाचे हेलिकॉप्टर के पायलट और सह-पायलट समुद्र में संकट में फंस गए थे। आशंका है कि हेलिकॉप्टर किसी हमले या तकनीकी कारण से दुर्घटनाग्रस्त हो गया था। ऐसे चुनौतीपूर्ण हालात में अमेरिकी नौसेना ने पहली बार एक उन्नत ड्रोन बोट का इस्तेमाल कर दोनों पायलटों को सुरक्षित बाहर निकाला। इस सफल अभियान ने समुद्री बचाव कार्यों में नई तकनीक की क्षमता को साबित कर दिया है।
ड्रोन बोट, जिसे तकनीकी भाषा में अनमैन्ड सरफेस व्हीकल (यूएसवी) कहा जाता है, बिना चालक के पानी की सतह पर संचालित होने वाली नाव है। इसे दूरस्थ कंट्रोल सेंटर से नियंत्रित किया जा सकता है, जबकि कई मॉडल पूरी तरह स्वचालित रूप से भी कार्य करते हैं। आधुनिक कैमरे, सेंसर, जीपीएस, सैटेलाइट संचार प्रणाली और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जैसी तकनीकों से लैस यह बोट समुद्र में लगातार निगरानी, खोज और बचाव अभियानों को अंजाम देने में सक्षम है।
जिस ड्रोन बोट का उपयोग अमेरिकी पायलटों को बचाने में किया गया, उसकी लंबाई लगभग 24 फुट बताई जाती है। यह करीब 65 किलोमीटर प्रति घंटा की गति से समुद्र में चल सकती है और लगभग 450 किलोग्राम तक भार वहन करने में सक्षम है। इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह एक बार में लगभग 2,000 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि समुद्र में किसी लापता व्यक्ति या दुर्घटनाग्रस्त विमान का पता लगाना बेहद कठिन होता है। ऐसे में ड्रोन बोट अपने कैमरों, सेंसरों और एआई आधारित विश्लेषण क्षमता के जरिए कम समय में सटीक जानकारी जुटा सकती है। यही कारण है कि यह तकनीक भविष्य में समुद्री सुरक्षा और आपदा राहत अभियानों की दिशा बदलने वाली साबित हो सकती है।
