
■ सूर्यकांत उपाध्याय
जब भगवान ने औरत को बनाया, तो वे शुक्रवार की देर रात तक काम कर रहे थे।
तभी एक फ़रिश्ते ने पूछा,
“इतना समय क्यों लग रहा है?”
भगवान ने कहा,
“क्या तुमने देखा है कि उसे बनाने के लिए मुझे कितनी शर्तें पूरी करनी हैं?”
● उसे हर परिस्थिति में काम करने में सक्षम होना चाहिए।
● उसे एक साथ कई बच्चों की देखभाल करनी आनी चाहिए।
● उसका आलिंगन सब कुछ ठीक कर देने वाला होना चाहिए, घुटने की खरोंच से लेकर टूटे दिल तक।
● और उसे यह सब केवल दो हाथों से करना है।
● बीमार होने पर भी वह खुद को संभाल लेती है और दिन में 18 घंटे काम कर सकती है।
फ़रिश्ता हैरान रह गया,
“सिर्फ़ दो हाथ? असंभव!
और यह सामान्य डिज़ाइन है?”
फ़रिश्ता औरत के पास गया और उसे छुआ।
“प्रभु, आपने उसे बहुत नरम बनाया है।”
भगवान ने कहा,
“वह नरम है, लेकिन मैंने उसे बहुत मज़बूत बनाया है। तुम्हें अंदाज़ा नहीं है कि वह कितना सह सकती है और कितनी मुश्किलों का सामना कर सकती है।”
फ़रिश्ते ने पूछा,
“क्या वह सोच सकती है?”
भगवान ने कहा,
“वह न सिर्फ़ सोचती है, बल्कि तर्क करती है, फ़ैसले लेती है और अपनी बात कहती है।”
फ़रिश्ते ने उसके गाल को छुआ…
“प्रभु, यहाँ से कुछ रिस रहा है! आपने उस पर बहुत ज़्यादा बोझ डाल दिया है।”
भगवान ने कहा,
“यह रिस नहीं रहा… ये आँसू हैं।”
“ये किसलिए हैं?” फ़रिश्ते ने पूछा।
भगवान ने कहा,
“आँसू उसके दुख, शक, प्यार, अकेलेपन, दर्द और गर्व को व्यक्त करने का माध्यम हैं।”
यह सुनकर फ़रिश्ता बहुत प्रभावित हुआ।
“प्रभु, आप सच में अद्भुत हैं। आपने हर चीज़ का ध्यान रखा है।
वह सच में एक असाधारण औरत है।”
भगवान ने कहा,
“हाँ, वह है।
■ उसमें एक आदमी को हैरान कर देने की शक्ति है।
■ वह मुश्किलों का सामना कर सकती है और बड़ी ज़िम्मेदारियाँ उठा सकती है।
■ उसमें खुशी, प्यार और अपनी स्पष्ट राय है।
■ वह तब भी मुस्कुराती है, जब वह चिल्लाना चाहती है।
■ वह तब भी गाती है, जब वह रोना चाहती है; खुशी के आँसू बहाती है, और तब भी हँसती है, जब वह डरी हुई होती है।
■ वह जिस पर विश्वास करती है, उसके लिए लड़ती है।
■ उसका प्यार निस्वार्थ होता है।
जब वह रिश्तेदारों या दोस्तों को खो देती है, तो उसका दिल टूट जाता है, फिर भी उसे जीने की ताकत मिल जाती है।”
फ़रिश्ते ने पूछा,
“तो क्या वह परफेक्ट है?”
भगवान ने कहा,
“नहीं… उसमें सिर्फ़ एक कमी है
वह अक्सर अपनी कीमत भूल जाती है।”
